बुंदेलखंड में रबी की फसल पर कोहरे की मार

बांदा जिले के तेन्दुरा गांव के किसान शेषकुमार सिंह ने बताया कि 20 बीघे में मसूर (दलहन) और 10 बीघे खेत में लाही (तिलहन) की फसल बोई है, जो कोहरा के कारण मुरझाने लगी है। इसी गांव के ग्राम प्रधान धीरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके करीब 50 बीघे खेतों की मेड़ पर अरहर की फसल है, जो सूखने लगी है।
क्षेत्र में सबसे ज्यादा बुरी हालत मध्य प्रदेश की सरहद से सटे फतेहगंज इलाके के दर्जनभर गांवों के खेतों में लगी फसलों की है। गोबरी-गोड़रामपुर, बघोलन, बिलरियामठ, राजाडांड़ी, कारीडांड़ी, डढ़वामानपुर, रक्सा, मवासीडेरा, बरछाडड़िया के किसानों की हालत कोहरे देख पतली होती जा रही है।
इस इलाके के करीब पांच सौ हेक्टेयर कृषि भूमि में दलहन और तिलहन की फसल थोक में बोई गई है, जो कोहरे की चपेट में आने की कगार पर है। नरैनी क्षेत्र पंचायत की अध्यक्ष (ब्लॉक प्रमुख) और डढ़वामानपुर गांव की किसान मीरा मिश्रा ने बताया कि कोहरे की वजह से रबी की फसल को भारी नुकसान हो रहा है, करीब 25 फीसदी फसल पूरी सूख तरह चुकी है।
इन्होंने बताया कि कोहरा और ठंड की वजह से किसान अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं, ऐसी स्थिति में जंगली जानवर भी रखवाली के अभाव में फसल चट कर रहे हैं। चित्रकूटधाम बांदा परिक्षेत्र में तैनात उप कृषि निदेशक यू.के. कटियार कहते हैं कि कोहरा की वजह से पड़ रहे पाला से फसल को बचाने के लिए किसान खेतों के चारों तरफ नीम की पत्ती जलाकर धुआं करें, वरना पाले से फसल को बचा पाना बड़ा मुश्किल होगा।
कुल मिलाकर, मौसम की मार यहां के किसानों को भारी पड़ सकती है और पाला जैसी आपदा किसानों को तबाह कर सकती है। कोहरा से निपटने के उपाय न तो प्रशासन के पास है और न ही किसान ही फसल के बचाव की स्थिति में हैं, लिहाजा नुकसान होना लाजिमी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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