नोटबंदी पर क्यों बंटी हुई है नीतीश और शरद की राय?
शरद यादव ने कहा कि आपातकाल के दौरान जबरन नसबंदी की वजह से जैसे कांग्रेस का पतन हुआ था, उसी तरह नोटबंदी की वजह से भाजपा सत्ता से बाहर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस कदम से समूचे देश में अव्यवस्था फैल गई
नई दिल्ली। नोटबंदी को लेकर सड़क से संसद तक घमासान मचा हुआ है। कोई इस फैसले की सराहना कर रहा है तो कोई आलोचना। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि एक ही पार्टी के दो बड़े नेता इस मुद्दे पर अलग-अलग खड़े हो गए हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार और जेडीयू के ही वरिष्ठ नेता शरद यादव की।

शरद यादव ने नीतीश कुमार से अलग रुख अख्तियार करते हुए नोटबंदी को अनियोजित और अदूरदर्शी फैसला बताते हुए आलोचना की है जबकि नीतीश ने 1000 और 500 के पुराने नोटों को बंद करने के मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी।
क्या कहा शरद यादव ने
शरद यादव ने कहा कि आपातकाल के दौरान जबरन नसबंदी की वजह से जैसे कांग्रेस का पतन हुआ था, उसी तरह नोटबंदी की वजह से भाजपा सत्ता से बाहर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस कदम से समूचे देश में अव्यवस्था फैल गई है।
शरद यादव ने आरोप लगाया कि यह फैसला जल्दबाजी में किया गया जब एक कॉरपोरेट समूह से रिश्वत लेने के मामले में कुछ नेताओं का नाम आया और वह मामला न्यायिक सुनवाई के लिए आने वाला था। उल्लेखनीय है कि संसद में चल रहे हंगामे से अलग, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी राजधानी में फिर नोटबंदी के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। उनके साथ जेडीयू नेता शरद यादव भी मौजूद हैं।
क्या है नीतीश कुमार की राय
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मोदी का फैसले के पीछे भावना सही है इसलिए इसका सम्मान किया जाना चाहिए। बिहार के सीएम ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शेर की सवारी कर रहे हैं जिससे उनका गठबंधन बिखर सकता है लेकिन उनके कदम के पीछे भावना सही है। हमें इसका सम्मान करना चाहिए।
पार्टी के इस दो बड़े नेताओं के अलग-अलग रूख से कार्यकर्ताओं में खासा परेशानी का माहौल है। कार्यकर्ता यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उनकी पार्टी नोटबंदी के समर्थन में खड़ी है या फिर विरोध में।












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