पूर्व आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की बढ़ी मुश्किल, UPSC ने लगाया संगीन आरोप
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूर्व आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की याचिका पर जवाब देने को कहा है। यूपीएससी ने कथित तौर पर गलत बयान देने और अदालत में भ्रामक हलफनामा पेश करने के लिए उनके खिलाफ झूठी गवाही की कार्यवाही की मांग की है। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने खेडकर को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है।
यूपीएससी का तर्क है कि खेडकर को 31 जुलाई को उनके पंजीकृत ईमेल के माध्यम से उनकी उम्मीदवारी रद्द होने की जानकारी दी गई थी। यह ईमेल वही था जिसका इस्तेमाल उन्होंने अपने सिविल सेवा कार्यक्रम (सीएसपी) 2022 आवेदन के लिए किया था। हालांकि, खेडकर ने अदालत में दावा किया कि उन्हें यूपीएससी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से ही उम्मीदवारी रद्द होने की जानकारी मिली।

यूपीएससी के आरोप
यूपीएससी का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश कौशिक ने कहा कि खेडकर ने अपने वकीलों को भी गलत जानकारी दी। कथित तौर पर उन्हें पता था कि वह शपथ लेकर झूठा बयान दे रही हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने इसकी सत्यता की शपथ ली। अधिवक्ता वर्धमान कौशिक ने आवेदन में कहा, "अदालत से अनुकूल आदेश प्राप्त करने के उद्देश्य से शपथ लेकर झूठे बयान देना, एक बहुत ही गंभीर अपराध है, जो कानूनी व्यवस्था की नींव को कमजोर करता है।"
यूपीएससी के आवेदन में यह भी बताया गया है कि खेडकर का हलफनामा 28 जुलाई, 2024 का है, जबकि उनकी उम्मीदवारी रद्द करने का आदेश 31 जुलाई को जारी किया गया था। यह विसंगति बताती है कि उनका हलफनामा सही नहीं हो सकता। यूपीएससी ने अदालत से उचित कार्यवाही शुरू करने और झूठी गवाही देने के लिए खेडकर के खिलाफ जांच का निर्देश देने का आग्रह किया है।
खेडकर की पिछली कानूनी कार्रवाइयां
खेडकर ने पहले यूपीएससी द्वारा उनकी उम्मीदवारी रद्द किए जाने के बारे में जारी प्रेस विज्ञप्ति को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दावा किया कि प्रेस विज्ञप्ति देखने तक उन्हें इस रद्दीकरण के बारे में पता नहीं था। न्यायालय ने यह कहते हुए उनकी याचिका का निपटारा कर दिया था कि यूपीएससी दो दिनों के भीतर अपना आदेश सूचित करेगा।
31 जुलाई को यूपीएससी ने आधिकारिक तौर पर खेडकर की उम्मीदवारी रद्द कर दी और उन्हें भविष्य की परीक्षाओं से प्रतिबंधित कर दिया। उन पर सिविल सेवा परीक्षा, 2022 के लिए अपने आवेदन में 'गलत जानकारी' देने का आरोप है। इसके अलावा, उन पर धोखाधड़ी करने और ओबीसी और विकलांगता कोटा लाभ का गलत तरीके से लाभ उठाने का आरोप लगाया गया था।
कानूनी कार्यवाही और भविष्य की सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होनी है। 1 अगस्त को ट्रायल कोर्ट ने खेडकर को गंभीर आरोपों के कारण अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिसके लिए गहन जांच की आवश्यकता थी। अब हाई कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि इन दावों के आधार पर झूठी गवाही के आरोपों पर आगे बढ़ना है या नहीं।
यह मामला भारत की सिविल सेवा परीक्षा प्रक्रिया में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर करता है। यह इस बात पर जोर देता है कि उम्मीदवारों के लिए अपने आवेदन और कानूनी कार्यवाही के दौरान सत्यनिष्ठ जानकारी प्रदान करना कितना महत्वपूर्ण है।












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