दिल्ली हाई कोर्ट ने कपिल वधावन की जमानत याचिका पर सीबीआई से स्थिति रिपोर्ट मांगी, 7 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली उच्च न्यायालय ने देवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के पूर्व प्रमोटर कपिल वधावन द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो को मामले की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। वधावन एक बड़े बैंक ऋण घोटाले में कथित संलिप्तता के कारण हिरासत में हैं। न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने सीबीआई को रिपोर्ट जमा करने के लिए 10 दिनों का समय दिया है। ताकि याचिका की वैधता को लेकर उठाई गई आपत्तियों का समाधान किया जा सके। अगली सुनवाई 7 नवंबर को होगी।
हिरासत में एकमात्र आरोपी
कार्यवाही के दौरान वधावन के वकील ने अदालत को बताया कि वधावन लगभग 600 दिनों से हिरासत में हैं और इस मामले में हिरासत में एकमात्र आरोपी हैं। उन्होंने कहा कि एक सह-आरोपी को हाल ही में जमानत मिल चुकी है। सीबीआई ने मामले की शुरुआत 2022 में की थी। जब वधावन और उनके भाई धीरज वधावन को 19 जुलाई 2022 को गिरफ्तार किया गया था।

सीबीआई ने उठाई प्रारंभिक आपत्ति
सीबीआई के वकील ने जमानत याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वधावन ने ट्रायल कोर्ट के स्थान पर सीधे उच्च न्यायालय का रुख किया। जो न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत है। इसके जवाब में वधावन के वकील ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय के पास ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई का अधिकार है। वकील ने यह भी उल्लेख किया कि वधावन को पहले ट्रायल कोर्ट द्वारा डिफॉल्ट जमानत दी गई थी। जिसे उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। लेकिन बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था।
सीआरपीसी के प्रावधानों पर बहस
अदालत में वधावन के वकील ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता का हवाला देते हुए बताया कि यदि जांच एजेंसी 60 या 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र दायर करने में विफल रहती है तो आरोपी डिफॉल्ट जमानत का हकदार होता है। इस मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज होने के 88वें दिन आरोप पत्र दाखिल किया था। जिसे ट्रायल कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।
यूनियन बैंक की शिकायत से शुरू हुआ था मामला
मामले की शुरुआत यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत से हुई थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि डीएचएफएल के तत्कालीन सीएमडी कपिल वधावन और निदेशक धीरज वधावन ने 17 बैंकों के एक संघ को धोखा देने की साजिश रची थी। आरोप है कि 42,871.42 करोड़ रुपए के ऋण की स्वीकृति के बाद डीएचएफएल ने रिकॉर्ड में हेराफेरी कर बैंकों को 34,615 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया।
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार वधावन बंधुओं ने बैंकों के ऋण का एक बड़ा हिस्सा हेराफेरी और पुनर्भुगतान में बेईमानी से चूक के माध्यम से गायब कर दिया था।












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