सोनिया गांधी को बड़ी राहत, नहीं होगी FIR, दिल्ली कोर्ट ने खारिज की याचिका, क्या है पूरा मामला?
Sonia Gandhi electoral roll allegations: दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के खिलाफ जांच की याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका उनके चुनावी सूची में कथित फर्जीवाड़े को लेकर दायर की गई थी। याचिका करने वाले ने दावा किया था कि सोनिया गांधी का वोटर लिस्ट में तब शामिल किया गया, जब वह भारतीय नागरिक नहीं थीं।
दिल्ली की कोर्ट में ये अपील अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने की थी, जिसमें उन्होंने सोनिया गांधी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की थी। लेकिन गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए कोट ने सोनिया गांधी के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाने की मांग को खारिज कर दिया है।

सोनिया गांधी को लेकर याचिका में क्या-क्या किए गए दावे?
अधिवक्ता विकास त्रिपाठी का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता पवन नारंग ने पिछले सप्ताह तर्क दिया था कि "दस्तावेजों से स्पष्ट है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल, 1983 को भारत की नागरिकता ली थी।" नारंग ने अदालत को बताया कि "उनका नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जिसे 1982 में हटा दिया गया। यह 1983 में फिर से दर्ज किया गया, जब योग्यता की तारीख 1 जनवरी, 1983 थी।"
"1982 में सोनिया गांधी का नाम क्यों हटाया गया था?
नारंग ने बुधवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया के समक्ष यह भी सवाल उठाया था कि "1982 में सोनिया गांधी का नाम क्यों हटाया गया था? इसका मतलब है कि चुनाव आयोग को कुछ मिला था।"
नारंग ने आगे कहा था, "उस समय शायद केवल कुछ ही दस्तावेज मौजूद थे, जैसे पासपोर्ट या राशन कार्ड। पैन और आधार नहीं थे।
1980 में उनके पास कौन से दस्तावेज थे, जिनसे यह साबित होता था कि वह भारत की नागरिक थीं?" उन्होंने तर्क दिया था कि मतदान के लिए भारतीय नागरिक होना पहली शर्त है, और नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र का निवासी होना दूसरी शर्त।
विकास त्रिपाठी, जो राउज़ एवेन्यू कोर्ट्स बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी हैं, ने नारंग के माध्यम से BNSS की धारा 175 (4) के तहत आवेदन दायर किया था। यह धारा किसी मजिस्ट्रेट को सार्वजनिक सेवक के खिलाफ जांच का आदेश देने का अधिकार देती है, यदि शिकायत उसके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान सामने आती है।












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