दिल्ली के छावला गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
दिल्ली के छावला इलाके में 19 वर्षीय एक युवती के साथ गैंगरेप और हत्या के मामले में अभियुक्तों की रिहाई को आदेश को चुनौती देने वली एक याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी।

दिल्ली के छावला इलाके में साल 2012 में हुए एक सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में तीन लोगों को बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ दायर समीक्षा याचिकाओं के खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अब पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी है। कोर्ट ने मामले में आरोपियों को पिछले साल नवंबर में रिहा किया था। मामले एक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने कहा कि मामले में पुनर्विचार करने के लिए कानूनी आधार नहीं है।
छावला गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली पुलिस ये बड़ा झटका है। अदालत ने मंगलवार को इस मामले में दाखिल पुनर्विचार अर्जियों को खारिज कर दिया। बता दें कि दिल्ली के छावला इलाके में एक लड़की की गैंगरेप और फिर बेहद क्रूरता से हत्या कर दी गई थी। पिछले साल 7 नवंबर को दिए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में पुलिस की जांच और ट्रायल पर सवाल उठाते हुए संदेह का लाभ देते हुए दोषियों को बरी कर दिया गया था।
पीड़ित परिवार और दिल्ली पुलिस ने फांसी की सजा पाए तीनों दोषियों को रिहा करने के फैसले पर पुर्नविचार करने की मांग की थी। याचिका पर कोर्ट ने कहा कि इस फैसले पर उन्हें कोई खामी नहीं है, इसलिए पुनिर्विचार का कोई औचित्य नहीं है।
छावला मामले में दोषियों को निचली अदालत और उसके बाद हाईकोर्ट से भी फांसी की सजा हो चुकी है। ऐसे में पीड़ित परिवार ने एक याचिका दायर कर दोषियों को रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका पर फैसला देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड को देखने पर जमानत के फैसले पर कोई खामी नजर नहीं आती। ऐसे में पुर्नविचार की मांग वाली अर्जियों को खारिज की जाती है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश धनंजय वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस अदालत द्वारा पारित पूर्वोक्त फैसले की समीक्षा की आवश्यकता वाले रिकॉर्ड के चेहरे पर कोई तथ्यात्मक या कानूनी त्रुटि नहीं है। ऐसे में समीक्षा याचिकाओं पर विचार करने का आधार नहीं होगा।
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