दिल्ली: कमेटी ऑफ पीस एंड हारमनी की पहली बैठक, फेक न्यूज फैलाने वालों पर शिकंजा

दिल्ली: कमेटी ऑफ पीस एंड हारमनी की पहली बैठक, फेक न्यूज फैलाने वालों पर कसेगा शिकंजा

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा ने सोमवार को 'कमेटी ऑफ पीस एंड हारमनी' नाम की समिति का गठन किया है। दिल्ली में हुई हिंसा के बाद ये कमेटी बनाई गई है। कहा गया है कि दिल्ली में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए काम करेगी। 9 सदस्‍यीय 'शांति व सद्भाव समिति' का नेतृत्‍व आप विधायक सौरभ भारद्वाज कर रहे हैं। कमेटी में विधायक आतिशी और गौरव चड्ढा भी हैं। सोमवार को कमेटी की पहली बैठक हुई है।

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बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस ने कहा, पहली मीटिंग में इस बात पर चर्चा की गई कि आखिर ऐसे कौन से कारण है, जिससे देशभर में और दिल्ली में दंगा फसाद हो रहे है। खासतौर से फेक न्यूज पर सख्ती की जरूरत है। भारद्वाज ने कहा, बहुत सारे केस में ऐसा देखा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप पर नफरत फैलाने वाले फेक मैसेज भेजे जाते है, जिन्हें लोग सच मान लेते है और जिसकी वजह से समाज में एक दूसरे के प्रति नफरत की भावना बढ़ रही है। दो समुदायों के बीच में नफ़रत फैलाना क्रिमिनल लॉ के अंदर जुर्म है जिसके लिए सजा का और जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए कमिटी ने इस पर चर्चा करके कुछ फैसले लिए है।

कमेटी में फैसला लिया गया कि अगर कोई व्यक्ति नफरत फैलाने वाले मैसेज को ट्विटर पर रिट्वीट, व्हाट्सएप्प पर फारवर्ड या फेसबुक पर शेयर भी करता है तो इससे उस व्यक्ति को 3 साल की सजा हो सकती है। जिसे रेडियो, अख़बार और मीडिया के माध्यम से प्रचारित किया जाएगा। जो नफरत फैलाने वाले मैसेज का स्क्रीनशॉट लेकर हमारी विधानसभा समिति को भेजेगा, उस पर समिति जांच करेगी। अगर पाया जाता है कि क्राइम बन रहा है तो उसको लॉ एंड एन्फोर्समेंट ऐजेंसी को भेजा जाएगा ताकि नफरत फैलाने वाले मैसेज को भेजने वाले व्यक्ति पर मुकदमा किया जा सकें।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हम जल्द ही एक फोन नंबर और एक ईमेल आईडी जारी करने जा रहे हैं। इस फोन नंबर और ईमेल पर लोग सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाले संदेशों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकेंगे। फेक खबर का कोई मैसेज अगर आता है तो स्क्रीन शॉट लेकर इस ईमेल आईडी के जरिए विधानसभा समिति को भेजा जा सकेगा। जिसकी जांच विधानसभा की यह समिति करेगी। ऐसी शिकायतों की जांच करने के बाद इसे कानून को लागू करने वाली संस्थाओं के पास भेजा जाएगा।

आप विधायक ने बताया कि फेक न्यूज को चेक करने के लिए एक एजेंसी की सहायता ली जाएगी, जो इस तरह के मामले में फैक्ट चेक करेगी। साथ ही इसके लिए पुलिस के रिटायर्ड आला अधिकारियों की भी सेवाएं ली जाएंगी। भारद्वाज ने बताया कि बैठक के दौरान इस तरह का सुझाव सामने आया कि शिकायतकर्ताओं को 10,000 रुपए देकर पुरस्कृत किया जाना चाहिए। हालांकि, इनाम की राशि अभी तय नहीं की गई है।

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