अब समुद्री दुश्मनों को कुचलकर रख देगी भारतीय नौसेना, 19,600 करोड़ रुपये खर्च करने की मिली अनुमति
भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने आज ऐतिहासिक फैसला लिया है। दरअसल, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय शिपयार्ड के साथ 19,600 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

समुद्र के रास्ते घुसपैठ करने वाले देशों और तस्करों पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 11 अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती जहाजों और छह अगली पीढ़ी के मिसाइल जहाजों के अधिग्रहण के लिए भारतीय शिपयार्ड के साथ 19,600 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
साल 2026 में शुरू होगी जहाजों की डिलीवरी
बता दें कि अगली पीढ़ी के 11 अपतटीय गश्ती जहाजों में से 7 जहाजों को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) और चार जहाजों को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा तैयार किया जाएगा। इन जहाजों को स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया जाएगा। साथ ही जहाजों की डिलीवरी सितंबर 2026 में शुरू होगी।
13 लिंक्स-यू2 फायर कंट्रोल सिस्टम की खरीद के लिए समझौता
इसके अलावा रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को भारतीय नौसेना के लिए 1,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 13 लिंक्स-यू2 फायर कंट्रोल सिस्टम की खरीद के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, लिंक्स-यू2 सिस्टम एक नेवल गन फायर कंट्रोल सिस्टम है जिसे स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है। यह समुद्री अव्यवस्था के साथ-साथ हवा/सतह के लक्ष्यों को सटीक रूप से ट्रैक करने और लक्ष्य को भेदने में सक्षम है।












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