कौन हैं दाऊदी बोहरा मुस्लिम? जिन्होंने PM मोदी को वफ्फ बिल के लिए कहा- 'शुक्रिया'
Dawoodi Bohra community: देश भर में लागू किए गए वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बवाल मचा हुआ है। वक्फ विधेयक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है और विपक्षी पार्टियों की आपत्तियों पर कोर्ट सुनवाई कर रहा है।
इस सबके बीच केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए वक्फ संशोधन विधेयक के लिए दाऊदी बोहरा समुदाय ने पीएम मोदी को धन्यवाद दिया है। दाऊदी बोहरा समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक में बोहरा समुदाय के उद्योगपति और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से लेकर शिक्षकों और डॉक्टरों तक के विविध समूह शामिल हुए।

दाऊदी बोहरा समुदाय के प्रतिनिधिमंडल ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि ये एक ऐसा बदलाव है जिसका लंबे समय से उनका समुदाय बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
इस बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री ने दाऊदी बोहरा समुदाय के साथ अपने पुराने संबंधों को याद किया और वक्फ (संशोधन) अधिनियम की शुरूआत से पहले किए गए प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने वक्फ के कारण लोगों के सामने आने वाली कठिनाइयों के बारे में बात की।
प्रतिनिधिमंडल ने अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कैसे उनके समुदाय के सदस्यों की संपत्ति को वक्फ दावों के तहत गलत तरीके से ले लिया गया था। उन्होंने बताया कि कैसे नया कानून अल्पसंख्यक समूहों को लाभ पहुंएगा। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने समुदाय के धार्मिक नेता सैयदना मुफ़द्दल सैफ़ुद्दीन से वर्षों से सामाजिक कल्याण गतिविधियों में दाऊदी बोहरा समुदाय की भूमिका की सराहना की।
जानिए दाऊदी बोहरा समुदाय?
दाऊदी बोहरा समुदाय मुस्लिम जाति के अंतर्गत आते हैं। ये इस्लाम के शिया संप्रदाय के अंतर्गत आते हैं। भारत में इनकी 20 लाख से ज़्यादा की आबादी है। बोहरा समुदाय में दाऊद और सुलेमान दो अनुयायियों के दो प्रमुख समूह है। जिसके धार्मिक सिद्धांतों में खास अंतर नहीं हैं। जिसमें 15 लाख दाऊदी बोहरा हैं।
बोहरा समुदाय की कैसे हुई उप्पत्ति?
बोहरा समुदाय की उत्पत्ति मिस्र के मुस्तली संप्रदाय से हुई है, जिसने बाद में अपने धार्मिक केंद्र को यमन में स्थानांतरित कर दिया और फिर 11वीं शताब्दी में धार्मिक दूतों के ज़रिए भारत में अपना रास्ता बनाया। समुदाय में एक महत्वपूर्ण बदलाव तब आया जब 1539 में, अपने भारतीय अनुयायियों की संख्या में वृद्धि के कारण, संप्रदाय का मुख्यालय यमन से भारत के सिद्धपुर में स्थानांतरित कर दिया गया।
कैसे दो समुदायों में बंटा बोहरा समुदाय?
बोहरा समुदाय के इतिहास में एक अहम घटना 1588 में घटी, जिसके कारण दाऊद बिन कुतुब शाह और सुलेमान के अनुयायियों के बीच नेतृत्व विवाद के बाद दो प्रमुख गुटों में विभाजन हो गया। इस विभाजन के बावजूद, दोनों समूहों ने समान धार्मिक सिद्धांतों को बनाए रखा, जिसमें दाऊदी बोहरा शिया मान्यताओं के साथ निकटता से जुड़े रहे।
कहां बसे हैं दाऊद बोहरा समुदाय के लोग?
भारत में दाऊदी बोहरा समुदाय मुख्य रूप से गुजराज के सूरत, जामनगर, अहमदाबाद, राजकोट, दाहोद और महाराष्ट्र के पुणे, मुंबई, नागपुर, मध्य प्रदेश के उज्जैन , इंदौर, राजस्थाना के उदयपुर और भीलवाड़ा और कोलकाता, चेन्नई में भी बसे हैं। इसके अलावा पाकिस्तान, बिट्रेन, अमेरिका, ईराक, दुबई, सऊदी अरब में भी इस समुदाय के लोग बसे हैं। मुंबई में दाऊदी बोहरा लगभग ढ़ाई सौ साल पहले आकर बसे।
दाऊदी बोहरा मुसलमानों की खास बातें
- दाऊदी बोहरा मुसलमान फातिमी इमाम से जुड़े हैं, जो पैंगबर मोहम्मद के वंशज हैं।
- दाऊदी बोहरा इमामों को मानते हैं।
- 10वीं से 12वीं सदी के बीच इस्लामी दनिया के अधिकांश हिस्सों में राज करने के दौरान इन मुसलमानों ने साहित्य, विज्ञान, कला और वास्तु के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियां दर्ज करवाई।
- ये समुदाय पढ़ा-लिखा समुदाय होता है। इस समुदाय के कुछ लोग किसानी करते हैं वरना अधिकांश लोग बिजनेस ही कर रहे हैं।
- मेहनतकश और शांतिप्रिय माने जाने वाला ये समुदाय दान-धर्म में भी आगे बढ़कर हिस्सा लेता है।
- दरगाह, कब्रस्तान का नियंत्रण रखने वाले इनके कई ट्रस्ट हैं।
- ये मुस्लिम समुदाय अपने काम से मतलब रखता है।












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