आपदा के दौरान ये 6 एजेंसियां करती हैं काम, लोगों को बचाने के लिए युद्धस्तर पर होता है काम

खतरनाक चक्रवात बिपरजॉय को लेकर देशभर में अलर्ट जारी किया है। कई ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। इस तूफान का असर महाराष्ट्र और गुजरात में अभी से दिखने भी लगा है। मौसम विभाग के अनुसार चक्रवाती तूफान बिपरजॉय 15 जून की शाम तक जखाऊ बंदरगाह के पास सौराष्ट्र और कच्छ से टकराएगा। बताया जा रहा है कि इस तूफान की रफ्तार 165 किमी प्रति घंटे तक हो सकती है।

लेकिन इस तबाही को रोकने के लिए हमारे देश की एजेंसियां मुस्तैद हैं। लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगाने के लिए तैयार हैं। चलिए जानते हैं आपदा के दौरान ये 6 एजेंसियां कैसे करती हैं काम। तबाही को रोकने के लिए कैसे बनाई जाती है रणनीति? आसान भाषा में समझिए यहां

Cyclone biparjoy

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण(NDMA)
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भारत में आपदा प्रबंधन के लिए सर्वोच्च संस्था है। इस एजेंसी के पास काफी तेज तर्रार जवान होते हैं जो कि आपदा के दौरान फंसे लोगों को मौत के मुंह से बचा लेते हैं। इस संस्था के अध्यक्ष खुद प्रधानमंत्री होते हैं। इसके अलावा इसमें 9 अन्य सदस्य भी होते हैं। इनमें से एक को उपाध्यक्ष का पद दिया जाता है। नेशनल डिजास्टर रेसपॉन्स फोर्स (NDRF) इसी एजेंसी के तहत काम करती है।

स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी(SDMA)
एसडीएमए (SDMA) का मतलब स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी होता है। हर राज्य में यह संस्था होती है और इसका प्रमुख वहां का मुख्यमंत्री होता है। राज्य में भी इसके लिए एक कमेटी बनाई जाती है। यह कमेटी SDMA के साथ मिलकर काम करती है। अगर आपदा छोटी मोटी है तो राज्य की यह एजेंसी ही निपट लेती है। अगर बड़ी है तो यह राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर काम करती है।

नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी (NEC)
एनईसी (NEC) का मतलब होता है नेशनल एग्जीक्यूटिव कमेटी। इसे भारत सरकार के गृह विभाग के अधिकारी चलाते हैं । इसके प्रमुख गृहमंत्री के सचिव होते हैं। जिनके साथ कृषि, एटॉमिक एनर्जी, रक्षा, पानी सप्लाई, पर्यावरण जैसे मंत्रालयों के सचिव भी शामिल होते हैं। यह कमेटी ही राष्ट्रीय आपदाओं से निपटने के लिए नीतियां और योजनाएं बनाती है।

डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट (DDMA)
डीडीएमए (DDMA) का मतलब होता है डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी। इसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करते हैं। इसकी भी एक कमेटी होती है जिसमें जिले का निर्वाचित प्रतिनिधि (विधान सभा / नगर पार्षद का सदस्य) होता है। डीडीएमए का काम होता है कि एनडीएमए और एसडीएमए जो नीतियां बनाते हैं, उनका पालन किया जाए।

सेना के जवान
स्थिति जब भयावह रहती है तब सेना, नौसेना, कोस्टगार्ड और अर्धसैनिक बलों की मदद ली जाती है। खतरनाक चक्रवात का अलर्ट मिलते ही देश की सेनाओं और अर्धसैनिक बलों को राहत ड्यूटी पर लगा दी जाती है।

स्थानीय प्रशासन
आपदा के दौरान नगरपालिका, पंचायत सदस्य से लेकर और भी कई स्थानीय संस्थाओं की मदद ली जाती है। साथ ही सेना या राहत एवं आपदा बचाव टीम को मदद करती हैं।

गुजरात में 47,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया
गुजरात सरकार ने 14 जून को कच्छ में गंभीर चक्रवाती तूफान बिपरजोय के संभावित भूस्खलन को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों से 47,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है। मौसम विभाग ने कच्छ और सौराष्ट्र के तटीय जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है जहां तूफान के दस्तक देने पर तेज हवाएं और भारी बारिश होगी। गुजरात तट की ओर बढ़ते चक्रवात के साथ, सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई।

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