अगर आप भी अपने 5 -11 साल के बच्चे को कोविड वैक्सीन लगवाना चाहते हैं, तो पहले पढ़ें ये रिपोर्ट...

सांकेतिक तस्वीर
EPA
सांकेतिक तस्वीर

भारत में 5 जुलाई, 2022 को कोरोना के एक लाख से ज़्यादा एक्टिव मरीज़ थे. पिछले दिन के मुकाबले ये संख्या लगभग 2 हज़ार ज़्यादा हैं. रोजाना आने वाले मामले कुछ हज़ार में सिमटने की वजह से अब कोरोना को लेकर लोगों में खौफ़ कम हो गया है.

टेंशन उन बच्चों के माता-पिता को ज़्यादा है जिनके बच्चों के लिए भारत में अभी कोरोना का टीका उपलब्ध नहीं है.

यानी 5-11 साल के बच्चों के अभिभावक, फ़िलहाल थोड़े डरे सहमे हैं. ख़ास तौर पर इस वजह से भी क्योंकि गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुल गए हैं.

इस साल अप्रैल में बच्चों के स्कूल खुलने के बाद कुछ स्कूलों में बच्चों में कोरोना के मामले सामने आए थे, जिसके बाद कुछ स्कूलों ने दोबारा से ऑनलाइन क्लास लेना शुरू कर दिया था.

हालांकि, भारत में 5-11 साल के बच्चों के लिए कोरोना का टीका फ़िलहाल बाज़ार में उपलब्ध नहीं है. पर केंद्र सरकार की तरफ़ से उन्हें इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है. इसी साल 26 अप्रैल को भारत के स्वास्थ्य मंत्री ने इस बारे में ट्वीट भी किया था.

https://twitter.com/mansukhmandviya/status/1518863947386224641

लेकिन टीका आ भी जाए, तो बच्चों को लगवाने से पहले ये रिपोर्ट ज़रूर पढ़ें.

सांकेतिक तस्वीर
Getty Images
सांकेतिक तस्वीर

दि लैंसेट की रिपोर्ट

मेडिकल पत्रिका दि लैंसेट में 'बच्चों पर कोरोना का टीका कितना असरदार' शोध पत्र प्रकाशित किया है.

इस शोध पत्र के प्रकाशित होने के बाद बहस शुरू हो गई है कि क्या सभी बच्चों को कोरोनो का टीका लगाने की अनिवार्यता वाली रणनीति कितनी कारगर है या नहीं.

30 जून को प्रकाशित ये शोध उन बच्चों पर किया गया है जिन्हें फाइज़र वैक्सीन का टीका लगा.

फाइज़र के टीके को 5-11 साल के बच्चों में इस्तेमाल की इजाज़त पिछले साल दिसंबर में मिली थी.

ये शोध इटली के बच्चों में किया गया, जहाँ जनवरी में कोविड 19 के ओमिक्रोन वैरिएंट ने दस्तक दी थी और मास वैक्सीनेशन स्ट्रेटजी अपनाई गई.

शोध के मुताबिक जनवरी से अप्रैल के बीच टीका नहीं लेने वाले 1 लाख बच्चों में इंफेक्शन रेट 42 हज़ार बच्चों का था. इनमें से गंभीर कोविड के मामले 57 थे.

वहीं टीका लिए हुए 1 लाख बच्चों में इंफेक्शन रेट 23 हज़ार बच्चों का था. इनमें से गंभीर कोविड के मामले 26 थे.

इन आँकड़ों को विशेषज्ञ अपने-अपने तरीके से समझा रहे हैं.

ऐसे में बच्चों को टीका लगवाकर कोरोना से कितना सुरक्षित किया जा सकता है.

ये भी पढ़ें : ज़ायोकोव-डी वैक्सीन: बिना सुई का टीका कितना असरदार?

वैक्सीन
Getty Images
वैक्सीन

भारत में विशेषज्ञों की राय

एम्स के एपिडेमोलॉजिस्ट डॉक्टर संजय राय कहते हैं, कोविड महामारी की लड़ाई में इस वक़्त किसी भी उम्र सीमा के लिए 'मास वैक्सीनेशन स्ट्रैटेजी' की ज़रूरत नहीं है.

इसके पीछे वो दलील देते हैं. उनका तर्क है, "टीका के प्रयोग का हमेशा क्लियर ऑब्जेक्टिव तय होना चाहिए. या तो बीमारी रोकने के लिए या गंभीर कोविड या मौत से बचाव के लिए.

इसलिए पहले ये तय करना होगा कि बच्चों में किस ग्रुप में गंभीर कोविड के मामले सामने आ रहे हैं, ये देखने वाली बात होगी. दूसरी बात ये है कि वैक्सीन की भूमिका उस वक़्त बहुत थी, जब इंफेक्शन इतना नहीं फैला था. शुरुआत में इसकी ज़रूरत थी. लेकिन समय के साथ इसकी ज़रूरत कम हो गई है. आईसीएमआर के चौथे सीरो सर्वे में पाया गया है कि 60 फीसदी बच्चों को कोविड हो चुका है और वो बहुत गंभीर नहीं था.

इसलिए बिना वजह बच्चों को कोविड वैक्सीन देने की ज़रूरत नहीं है. वैक्सीन में कुछ एडवर्स इवेंट के मामले भी आते हैं, जो वैसे बहुत कम हैं. लेकिन वैक्सीन लगा कर बच्चों को उन एडवर्स इवेंट्स के लिए धकेलना उचित नहीं है."

ये भी पढ़ें : बूस्टर डोज़: कोरोना वैक्सीन का प्रिकॉशन डोज़ कैसे, कब और कहां मिलेगा?

दिल्ली के जाने माने बच्चों के डॉक्टर अरुण वाधवा भी डॉ. संजय की बात से इत्तेफ़ाक रखते हैं.

बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं कि भारत सरकार को बड़ों की तरह की रणनीति बच्चों में अपनाते हुए दूसरी बीमारी से जूझ रहे और ज़रूरतमंद बच्चों को पहले टीका लगाने की रणनीति अपनानी चाहिए.

हालांकि, बायोलॉजिकल ई के प्रवक्ता डॉक्टर इ विक्रम पराड़कर के मुताबिक़ भारत सरकार को 'मास वैक्सीनेशन' की स्ट्रेटी ही अपनानी चाहिए. 5-11 साल की उम्र में कोविड वैक्सीन का असर बहुत ही अच्छा देखने को मिला है.

लॉन्ग कोविड के बारे में अभी हमें बहुत ज़्यादा नहीं पता है. बच्चों में ये दिक़्क़त भी हो सकती है. ऐसे में बच्चों के जीवन को क्यों रिस्क में रखें हम. ऐसा इसलिए ताकि बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आए. वो कहते हैं कि इतनी तैयारी के बाद एक भी बच्चे को आईसीयू में भर्ती नहीं होना चाहिए.

ये भी पढ़ें : कोरोना वायरस के सभी वैरिएंट के लिए क्या एक वैक्सीन संभव है?

सांकेतिक तस्वीर
Getty Images
सांकेतिक तस्वीर

भारत में बच्चों के टीकाकरण की स्थिति

भारत में दो वैक्सीन को 5-12 साल के बच्चों पर इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए भारत सरकार ने मंज़ूरी दी है. वैक्सीन के सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए भारत सरकार की गाइडलाइन का अभी अभिभावकों को इंतज़ार है.

ये वैक्सीन है बायोलॉजिकल ई की कोर्बेवैक्स और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन.

बायोलॉजिकल ई की तरफ़ से 22 अप्रैल को जारी प्रेस रिलीज़ में बताया गया है कि कोर्बेवैक्स 30 करोड़ डोज़ बना लिए हैं, जिसमें से 10 करोड़ डोज भारत सरकार को सप्लाई भी कर दिया है. इसमें से 3 करोड़ डोज़ 12-18 साल के बच्चों के लिए इस्तेमाल किया गया है. वहीं, टीका 5-12 साल के बच्चों के लिए भी इस्तेमाल होना है, लेकिन अभी बाज़ार में ये सभी बच्चों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं है.

5-12 साल के बच्चों के लिए भारत में वैक्सीन में देरी क्यों? इस सवाल के जवाब में डॉक्टर इ विक्रम पराड़कर कहते हैं, "जब 25 अप्रैल को भारत सरकार ने बच्चों के वैक्सीन को मंज़ूरी दी थी तब 12-18 साल के बच्चों का टीकाकरण अभियान चल रहा था. सरकार ने पहले उस उम्र के बच्चों में वैक्सीन का असर देखा और थोड़ा 5-12 साल के बच्चों के लिए थोड़ा इंतजार करना मुनासिब समझा. जल्द ही सरकार 5-12 साल के बच्चों के टीकाकरण की इजाज़त देगी, ऐसा हमें लगता है. "

ये भी पढ़ें : कोरोना के इलाज के लिए नहीं मिली बीमे की रकम, लोगों को लेना पड़ा क़र्ज़

सांकेतिक तस्वीर
Getty Images
सांकेतिक तस्वीर

भारत के कोविड टास्क फोर्स के शीर्ष के अधिकारियों से सरकार की रणनीति पर बीबीसी ने सम्पर्क करने की कोशिश की. लेकिन ख़बर लिखे जाने तक हमें उनसे जानकारी नहीं मिल सकी है. .

उसी तरह से भारत बायोटेक को भी CDSCO से 6-12 साल के बच्चों पर इस्तेमाल के लिए मंज़ूरी मिली हुई है. भारत बायटेक की वैक्सीन यूनिवर्सल है. यानी जो बड़ों को लग रही है वही बच्चों को भी लगेगी. केंद्र सरकार ने इसके इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए ही फ़िलहाल मंज़ूरी दी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+