विदेशी मदद पर विवाद के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया, राज्यों को क्या-क्या किया गया सप्लाई
नई दिल्ली, मई 5: देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिस वजह से एक्टिव केस की संख्या 34 लाख के पार पहुंच गई है। वैसे तो दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस की दूसरी लहर आई, लेकिन इतना ज्यादा प्रभाव कहीं पर नहीं देखा गया। भारत में हालात ऐसे बन गए हैं कि अस्पतालों में बेड, वेटिंलेटर, ऑक्सीजन और जीवन रक्षक दवाइयों की भारी कमी है। हालांकि बीते कुछ दिनों में कई देश भारत की मदद को आगे आए और बड़ी संख्या में मेडिकल उपकरण भेजे, लेकिन वो कई दिनों तक कागजी कार्रवाई में एयरपोर्ट पर ही पड़े रहे। मामले में विवाद बढ़ता देख अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सफाई दी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक जो मदद विदेश से आई थी, उनको राज्यों में भेजा जा रहा है। अभी तक राज्यों को 1764 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर, 1760 ऑक्सीजन सिलेंडर, 7 ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट, 450 वेंटिलेटर, 1.35 लाख रेमडेसिविर और 1.20 लाख फेविपिराविर स्ट्रिप्स भेजे गए हैं। वहीं बुधवार को ऑस्ट्रेलिया से राहत सामग्री की एक और खेप आई, जिसमें 1056 वेंटिलेटर और 43 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर शामिल हैं।
राजनयिकों के लिए क्या है व्यवस्था?
वहीं दूसरी ओर राजधानी दिल्ली में स्थिति कई दूतावासों में कर्मचारियों, राजनयिकों, लोकल कर्मचारियों के कोरोना पॉजिटिव होने की खबर सामने आई थी। सूत्रों के मुताबिक भारतीय विदेश मंत्रालय का प्रोटोकॉल डिविजन मामले को देख रहा है। साथ ही सभी को जरूरी मदद उपलब्ध करवाई जा रही है। हालांकि राजनयिकों के लिए कोई स्पेशल अस्पताल की व्यवस्था नहीं की गई है।












Click it and Unblock the Notifications