शोधकर्ताओं का दावा: कोरोना का दोबारा संक्रमण और खतरनाक, स्वास्थ्यकर्मियों को 3 गुना ज्यादा खतरा

नई दिल्ली। कोरोना वायरस (Coronavirus) बीमारी एक नई बीमारी तो है ही साथ ही ये वायरस खुद में बदलाव भी कर रहा है। ये दुनियाभर में नई-नई किस्मों में फैल रहा है। यही वजह है कि इसके संक्रमण और असर के बारे में रोज नई जानकारी सामने आती रहती है। अब नए शोध में सामने आया है कि दोबारा कोरोना वायरस होने का खतरा रियल है और ये पहली बार के इंफेक्शन से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। भारतीय शोधकर्ताओं के हाल ही में प्रकाशित शोध में ये दावा किया गया है।

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    ये शोध कस्तूरबा संक्रामक रोग अस्पताल मुंबई, सेंटर फॉर जेनेरिक इंजीनियरिंग और बॉयोटेक्नॉलॉजी के साथ ही सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटेड बॉयोलॉजी (CSIR-IGOB) के शोधकर्ताओं ने मिलकर प्रकाशित किया है।

    स्वास्थ्यकर्मियों में तीन गुना खतरा
    शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कोरोना के खिलाफ जंग में लगे फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों में दोबारा संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। साथ ही स्वास्थ्य कर्मी पीपीई किट की कमी से भी जूझ रहे हैं।

    शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में मुंबई के चार स्वास्थ्य कर्मियों के मामलों को शामिल किया है। सभी चारों में क्लीनिकल निष्कर्षों, आरटी-पीसीआर टेस्ट और जीनोम-अनुक्रमण के विश्लेषण के आधार पर संक्रमण की पुष्टि हुई। शोध रिपोर्ट में बताया गया कि हमने ऐसे चार स्वास्थ्य कर्मियों की पहचान की जिन्हें मई या जून में सार्स कोविड-2 आरटी-पीसीआर के लिए पॉजिटिव टेस्ट किया गया था। इसके बाद जुलाई में किए गए आरटी-पीसीआर टेस्ट में उनमें फिर से कोविड-19 के लक्षण पाए गए।

    विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया कि तीन मामले कस्तूरबा अस्पताल में सामने आए जबकि चौथा मामले का टेस्ट पीडी हिंदुजा अस्पताल में किया गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि ये हमारे ध्यान में तब आया जब उसके चिकित्सक ने हमें उनके नमूनों को जांच के लिए कहा। आरटी-पीसीआर के नतीजों और क्लीनिकल प्रस्तुति के आधार पर हमें फिर से कोरोना संक्रमित होने का संदेह हुआ जिसके बाद आरटी-पीसीआर टेस्ट कराया गया जिसमें इसकी पुष्टि हुई। इसके बाद पूरे जीनोम अनुक्रमण का अध्ययन किया गया।

    स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा की जरूरत
    शोध में दावा किया गया है कि पूरे जीनोम अनुक्रमण में परिवर्तन का अध्ययन करने के बाद ये पाया गया है कि चूंकि स्वास्थ्यकर्मी दोबारा संक्रमण के लिए सबसे ज्यादा शिकार हो सकते हैं ऐसे में उन्हें अधिक सुरक्षा की जरूरत है। शोध के मुताबिक स्वास्थ्यकर्मियों में दोबारा संक्रमण के खतरे को देखते हुए इसे स्वास्थ्य देखभाल नीति निर्धारण में संबोधित किया जाना चाहिए।

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