ICMR ने राज्यों से वापस मांगी रैपिड टेस्टिंग किट, कहा- ठीक नहीं मिल रहे नतीजें
नई दिल्ली। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने राज्यों को भेजी गईं रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट वापस मांगी हैं। आईसीएमआर ने कहा है कि जो रिजल्ट इस किट्स से मिले हैं वो संतोषजनक नहीं हैं। ऐसे में इनसे टेस्ट करना ठीक नहीं होगा। ऐसे में राज्यों को जो रैपिड किट कोरोना टेस्ट के लिए भेजी गई थीं, उन्हें वापस कर दिया जाए। किट से सही नतीजे ना मिलने की शिकायत के बाद आईसीएमआर इनका इस्तेमाल ना करने के लिए राज्यों को पहले ही कह चुका है।

चाइनीज कंपनी से खरीदी हैं ये किट
केंद्र ने दो चीनी कंपनियों से 5 लाख किट खरीदी थीं। जिसके बाद इन्हें राज्यों को भेजा गया। इसका इस्तेमाल शुरू करते ही राजस्थान समेत कई राज्यों ने किट पर सवाल उठाया। जिसके बाद आईसीएमआर ने राज्यों से टेस्ट रोकने को कहा और इसकी जांच शुरू की। सोमवार को आईसीएमआर ने माना कि किट से सही नतीजे नहीं मिल रहे हैं और इनको वापस मांगा है।

गुणवत्ता खराब, कीमत को लेकर भी विवाद
चीन से आई इन किट्स की गुणवत्ता को एकदम खराब निकली ही है। वहीं इनकी कीमतों को लेकर भी विवाद है। दरअसल, रैपिड टेस्ट किट को लेकर सामने आया है कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद को बेची गई इस किट में बहुत मोटा मुनाफा कमाया गया है। इस किट की भारत में आयात लागत 245 रुपए है, लेकिन इसे ICMR को 600 रुपए प्रति किट बेचा गया है, यानी करीब 145 फीसदी का मुनाफा कमाया गया। दिल्ली हाईकोर्ट में ये मामला जाने के बाद इस पर खुलासा हुआ।

विपक्ष ने उठाए सवाल
कोरोना एंटीबॉडी रैपिड किट की खरीद को लेकर मोदी सरकार और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने पूछा है कि आईसीएमआर को 245 रुपए में आयात की गई एंटीबॉडी टेस्ट किट को 600 रुपए में क्यों खरीदना पड़ा। राहुल गांधी ने कहा है कि ऐसे समय में भी इस तरह की मुनाफाखोरी गलत है। इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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