मोदी सरकार का बनाया क़ानून कोरोना त्रासदी में बना रोड़ा

भारत कोरोना संकट
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भारत सरकार के एक क़ानून के कारण ग़ैर-लाभकारी संगठन यानी एनजीओ ज़रूरतमंद लोगों तक ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स की आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं.

पिछले साल कोरोना संक्रमण की पहली लहर जब चरम पर थी तब भारत सरकार ने फ़ॉरन कंट्रिब्यूशन रजिस्ट्रेशन एक्ट यानी एफ़सीआरए में संशोधन किया था.

इस एक्ट में तब्दीली के कारण भारत में चलने वाले एनजीओ किसी अन्य समूह को किसी भी तरह की विदेशी मदद नहीं दे सकते हैं. नए नियम के अनुसार विदेशों से आने वाले सभी फंड पहले दिल्ली के बैंक खाते में जमा होने चाहिए.

जब भारत सरकार ने इस क़ानून में संशोधन किया था तो बताया था कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और कुछ लोगों की ओर से विदेशी फंड का दुरुपयोग नहीं हो पाएगा. 'द अंट' एनजीओ की सह-संस्थापक जेनिफर लियांग कहती हैं कि भारत सरकार का संशोधन लोगों की जान बचाने में बाधा पैदा कर रहा है.

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जेनिफर ने बीबीसी न्यूज़नाइट में कहा कि एफ़सीआरए में संशोधन के कारण उनका एनजीओ विदेशी दानदाताओं की ओर से मुहैया कराए गए ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स वितरित नहीं कर पा रहा है और न ही सरकार तक पहुँचा पा रहा है क्योंकि हम दिल्ली में नया बैंक अकाउंट नहीं खोल पा रहे हैं.

भारत कोरोना की दूसरी लहर में भारी मेडिकल किल्लत से जूझ रहा है और मृतकों की संख्या हर दिन बढ़ रही है.

सरकारी आँकड़ों की अनुसार ढाई लाख से ज़्यादा लोगों की कोरोना से मौत हो गई है लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मौत का आँकड़ा सरकारी आँकड़ों से 30 गुना ज़्यादा हो सकता है. भारत के किसी अस्पताल में जगह नहीं है और लोग मेडिकल ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं.

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एफ़सीआरए नियम क्या कहते हैं:

  • एनजीओ और परोपकारी संस्थानों को काम शुरू करने से पहले एफ़सीआरए के तहत रजिस्टर होना होगा
  • विदेश से अगर कोई भी फंड आता है तो दिल्ली में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के किसी ब्रांच के अकाउंट में डालना होगा
  • एनजीओ दूसरे सहकारी संस्थानों को विदेशी मदद (पैसा या आपूर्ति) नहीं दे सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा

न्यूज़नाइट में 10 एनजीओ से बात की गई और सबने कहा कि नए क़ानून के कारण कोविड राहत बचाव में अनावश्यक देरी हो रही है. क्योंकि अतिरिक्त फॉर्म भरने पड़ रहे हैं और फंड के वितरण को लेकर नियम बहुत जटिल हैं. एमनेस्टी इंडिया के निदेशक आकार पटेल ने कहा कि नए क़ानून के अनुसार एनजीओ के विदेशी मदद स्वीकार करने को अपराध बना दिया गया है.

आकार पटेल ने कहा, ''अगर आप कोविड के लिए भी काम कर रहे हैं तो विदेशी मदद स्वीकार करने के लिए क़ानून बहुत जटिल हैं.''

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी विदेशी फंड से जुड़ी गतिविधियों को लेकर सशंकित रहे हैं. अतीत में पीएम मोदी मुख्यधारा के एनजीओ पर आर्थिक वृद्धि में बाधा खड़ी करने का आरोप लगा चुके हैं.

मानवाधिकार वकील जुमा सेन ने न्यूज़नाइट में कहा कि नए क़ानून से मोदी सरकार ने उन लोगों को चुप कराने की कोशिश की है जो सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं.

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सेन ने कहा कि अगर एनजीओ का कोई सदस्य विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लेता है तो अक्सर इसका नतीजा एफ़सीआरए रद्द किए जाने के रूप में आता है.

बीजेपी नेता नरेंद्र तनेजा इस संशोधन का ज़ोरदार तरीक़े से बचाव करते हैं. तनेजा कहते हैं, ''इस क़ानून को लेकर संसद में बहस हुई थी और संसद ने ही पास किया है. हम उम्मीद करते हैं कि बाक़ी के देश हमारे क़ानून का सम्मान करेंगे. हम एक संप्रभु राष्ट्र हैं.''

भारत में कोविड संकट अब ग्रामीण इलाक़ों में पहुँच रहा है. ग्रामीण भारत में काम करने वाले छोटे एनजीओ की चिंता है कि वे चाहकर भी ज़रूरतमंदों की मदद नहीं कर पाएंगे.

एनजीओ ने सरकार को चेतावनी दी है कि बढ़ती नौकरशाही से मुश्किल घड़ी में मदद पहुँचाने के काम को बेहद जटिल बना दिया गया है.

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