दक्षिण भारत, महाराष्ट्र के मुकाबले उत्तर भारत में दोगुनी रफ्तार से घट रहे हैं कोरोना के मामले

उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में दक्षिण भारत के राज्यों और महाराष्ट्र के मुकाबले दोगुनी तेजी से कोरोना के मामले कम हो रहे हैं।

नई दिल्ली, 7 जून। भारत में कोरोना की दूसरी लहर के कम होते मामलों के बीच एक बेहद ही दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है। दरअसल उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में दक्षिण भारत के राज्यों और महाराष्ट्र के मुकाबले दोगुनी तेजी से कोरोना के मामले कम हो रहे हैं।

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कोरोना के 9 मई पर पीक पर पहुंचने के बाद से हरियाणा में 3 जून तक प्रतिदिन दैनिक मामलों में औसतन 8.9% की गिरावट दर्ज की गई। यह दर उन 18 प्रमुख राज्यों के के बीच सबसे अधिक है, जिनकी हम यहां चर्चा करने जा रहे हैं। इस दौरान राजस्थान में यह (8.5%), दिल्ली में (8.2%), बिहार में (8.1%), उत्तर प्रदेश में (7.8%) और उत्तराखंड में (7.6%) रही। इस दौरान महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में भी नियमित गिरावट देखने को मिली, जो तमिलनाडु में 2.7% से लेकर आन्ध्र प्रदेश में 4.2% की दर के बीच रही। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि दक्षिण भारत और महाराष्ट्र के मुकाबले उत्तर भारत में कोरोना के मामले दोगुनी तेजी से घट रहे हैं। वहीं अगर पूरे भारत की बात करें तो कोरोना की पीक के बाद से कोरोना के दैनिक मामले 3.7% की दर से घटे हैं।

उत्तर भारत का कोविड रिपोर्टिंग सिस्टम हो सकता है इसका कारण
वहीं उत्तर और दक्षिण भारत में कोरोना के मामलों गिरावट की दर में इतने बड़े अंतर पर विशेषज्ञों ने कोई आश्चर्य नहीं जताया है। उन्होंने कहा इस बड़े अंतर के पीछे उत्तर भारत के कोरोना रिपोर्टिंग सिस्टम का लीक होना भी एक कारण हो सकता है।

इस अंतर के बारे में पूछे जाने पर वायरोलॉजिस्ट गगनदीप कांग ने बताया कि हमें यह जानने की जरूरत है कि राज्यों के कोविड रिपोर्टिंग सिस्टम कितने अच्छे हैं। जिन राज्यों में अपेक्षाकृत बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली है, जैसा की दक्षिण भारत में, उनसे अच्छी रिपोर्टिंग की उम्मीद है।

इसके अलावा उन्होंने इसके पीछे दो अन्य कारकों की ओर इशारा करते हुए कहा कि, 'यह संभव है कि विभिन्न क्षेत्रों में वायरस के विभिन्न रूप प्रचलन में हो। इसके अलावा हमें विभिन्न आबादी के बीच सेरोपॉजिटिविटी का निर्धारण करने वाले वायरस के पूर्व संपर्क को भी देखने की जरूरत है।'

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मामलों में गिरावट की दर के अंतर को दो राज्यों (महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश) में कोरोना के पीक पर पहुंचने की तारीखों के आधार पर भी बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

महाराष्ट्र में 24 अप्रैल को 65,447 मामलों के साथ कोरोना पीक पर पहूंचा वहीं, यूपी में 27 अप्रैल को 35,010 मामलों के साथ कोरोना पीक पर पहुंचा। महाराष्ट्र में 3 जून को औसतन 17,000 से अधिक मामले दर्ज हुए जबकि यूपी में यह संख्या घटकर 1,742 रह गई। इसका मतलब यह हुआ कि यूपी में जहां कोरोना के दैनिक मामलों में (7.8%) प्रतिशत की कमी दर्ज की गई वहीं इस दौरान महाराष्ट्र में कोरोना के मामले सिर्फ (3.3%) की दर से कम हुए।

इस ट्रेंड को भरोसा करें तो कोरोना के दैनिक राष्ट्रीय मामलों में महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 70% से अधिक हो गई है जो कि दूसरी लहर के पीक पर पहुंचने के समय से 50% कम है।

इसके अलावा पूर्वी भारत में भी कोरोना के कम होने की रफ्तार काफी धीमी है। पश्चिम बंगाल में कोरोना के दैनिक मामले 3.4% की दर से जबकि ओडिशा में यह 4.1% की दर से कम हो रहे हैं।

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