Opposition alliance: ड्राइविंग सीट पर बैठने की कोशिश में कांग्रेस?

बेंगलुरु में 17-18 जुलाई को प्रस्तावित बीजेपी-विरोधी दलों की बैठक के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से सहयोगी दलों के नेताओं को औपचारिक निमंत्रण भेजे जा रहे हैं। खड़गे की ओर से इसलिए, क्योंकि वे कांग्रेस पार्टी के औपचारिक अध्यक्ष हैं और बेंगलुरु उनके गृहराज्य की राजधानी है।

23 जून को पटना में हुई विपक्षी दलों की बैठक से यह इस मायने में अलग है, क्योंकि एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी पहुंचने वाली हैं। 17 जुलाई को उनकी ओर से सभी विपक्षी नेताओं को डिनर पर बुलाने की भी जानकारी सामने आ रही है।

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अबकी बार 24 पार्टियां!
कर्नाटक में नई-नई कांग्रेस सरकार बनी है और वहां के प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार भी पहले संकेत दे चुके हैं कि सोनिया भी विपक्ष की बैठक में शामिल हो सकती हैं। यही नहीं इस बार की बैठक में कांग्रेस की पहल पर उपस्थित होने वाली बीजेपी-विरोधी पार्टियों की संख्या भी 20 से ज्यादा रखने की कोशिश है। एएनआई के मुताबिक इस बैठक में कुल 24 दलों के शामिल होने की संभावनाएं हैं। जबकि, पटना में बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बुलावे पर लगभग 17 पार्टियां ही पहुंचीं थीं।

नई एंट्री में ज्यादातर कांग्रेस की सहयोगी
जिन करीब सात नई पार्टियों के बेंगलुरु वाली बैठक में शामिल होने की संभावना है, उनमें अधिकतर कांग्रेस की ही सहयोगी हैं। ये हैं- मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), एमडीएमके, केडीएमके, वीसीके, आरएसपी, ऑल इंडिया फॉर्वर्ड ब्लॉक, केरल कांग्रेस (जोसेफ) और केरल कांग्रेस (मणी)। ध्यान देने लायक बात ये है कि इन दलों का राष्ट्रीय स्तर पर कोई खास महत्त्व नहीं है, लेकिन इसके माध्यम से एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव जमाने की कोशिश की जा रही है।

बीजेपी की कोशिश का जवाब!
यही नहीं, यह भी जान लेना जरूरी है कि इन दलों में से दो केडीएमके और एमडीएमके 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी की सहयोगी रह चुकी हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने दलों की संख्या बढ़ाने पर ऐसे समय में जोर लगाया है, जब भाजपा से भी एनडीए के पूर्व सहयोगियों को फिर से एक साथ लाने की कवायदें चल रही हैं।

दूल्हा तो राहुल, बाकी बाराती- तारिक अनवर
एक तरफ कांग्रेस सोनिया गांधी को सामने लाकर एक तरह से विपक्ष को साझा नेतृत्व की पेशकश करने की कोशिश कर रही है। उसी समय कांग्रेस के एक नेता तारिक अनवर ने एक बयान दिया है, जो पार्टी के इरादे क थोड़ा ज्यादा स्पष्ट करता है। अनवर ने विपक्ष की ओर से पीएम उम्मीदवारी पर चर्चा के बीच कहा है कि 'दूल्हा तो राहुल गांधी ही होंगे, बाकी सब तो बाराती हैं।'

उनकी यह टिप्पणी राजद सुप्रीमो लालू यादव की ओर से पटना में आयोजित संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कही गई बात पर प्रतिक्रिया की तरह है, जिसमें उन्होंने कहा था, 'राहुलजी अब आप शादी कर लीजिए, हमलोग बारात में जाना चाहते हैं....आपकी मम्मी भी तो यही चाहती हैं।'

23 जून के बाद बदल चुके हैं विपक्ष के हालात
तथ्य ये है कि बेंगलुरु बैठक के लिए कांग्रेस के उतावलेपन के बीच देश की राजनीति में 23 जून के बाद कई सारे बदलाव हो चुके हैं। महाराष्ट्र में एनसीपी दो फाड़ हो चुकी है। शरद पवार जो तब कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाना चाहते थे, खुद अपना घर ही नहीं संभाल सके हैं। दूसरी तरफ उस बैठक में शामिल प्रफुल्ल पटेल को अब विपक्षी एकजुटता की बातों पर हंसी आती है।

बंगाल में पंचायत चुनाव में हुई हिंसा ने जमीनी स्तर पर कांग्रेस-सीपीएम और टीएमसी कार्यक्रताओं के बीच आपस में दुश्मन जैसे हालात बना दिए हैं। बिहार में पिछली बैठक के अगुवा नीतीश की अगुवाई वाले महागठबंधन को लेकर भी तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं। ऊपर से दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल जो उस दिन अध्यादेश पर शर्त लगाकर बैठक से निकले थे, उसपर भी कांग्रेस का कोई ठोस जवाब उन्हें नहीं मिला है। ऐसे में इस बार की बैठक में क्या निकलेगा, यह जानना बहुत ही रोचक हो गया है।

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