'राष्ट्रपति को करना चाहिए नए संसद भवन का उद्घाटन', राहुल गांधी के बाद अब खड़गे ने उठाए सवाल
New Parliament Building Inauguration: 28 मई को नवनिर्मित संसद का उद्घाटन प्रधानमंत्री के हाथों होना है। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति को करना चाहिए।

1200 करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार हुए देश के नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर राजनीति तेज हो गई है। 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद भवन का उद्घाटन करेंगे, लेकिन इससे पहले विपक्षी दल कांग्रेस ने पीएम मोदी और बीजेपी के खिलाफ हमला करना शुरू कर दिया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक दिन पहले ट्वीट करते हुए कहा कि संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री के हाथों नहीं बल्कि राष्ट्रपति के हाथ से होना चाहिए। वहीं अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को न्योता नहीं दिए जाने पर सवाल उठाएं हैं।
एक साथ कई ट्वीट करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्वारा किया जाना चाहिए। नई संसद के शिलान्यास के समय तत्कालीन राष्ट्रपति (रामनाथ कोविंद) को नहीं बुलाया गया था और इस बार उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू को नहीं बुलाया गया है। वे (बीजेपी) कहते हैं कि हम एससी/एसटी को महत्व देते हैं, लेकिन उन्हें महत्व और सम्मान नहीं देते हैं, जहां दिया जाना चाहिए।
आक्रामक अंदाज में खड़गे ने कहा कि ऐसा लगता है कि मोदी सरकार ने भारत के राष्ट्रपति का चुनाव केवल चुनावी कारणों से दलित और आदिवासी समुदायों से सुनिश्चित किया है। जबकि पूर्व राष्ट्रपति कोविंद को नई संसद के शिलान्यास समारोह में आमंत्रित नहीं किया गया था।
खड़गे यहीं नहीं रूके उन्होंने आगे कहा कि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए नहीं बुलाया जा रहा है। भारत की संसद भारत गणराज्य की सर्वोच्च विधायी संस्था है, और भारत का राष्ट्रपति इसका सर्वोच्च संवैधानिक अधिकार है। वह अकेले ही सरकार, विपक्ष और हर नागरिक का समान रूप से प्रतिनिधित्व करती हैं। वह भारत की प्रथम नागरिक हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा नए संसद भवन का उद्घाटन लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक होगा। मोदी सरकार ने बार-बार मर्यादा का अपमान किया है। भारत के राष्ट्रपति का कार्यालय भाजपा-आरएसएस सरकार के तहत प्रतीकवाद तक सिमट गया है।












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