कांग्रेस सांसद बोले- हमारे लिए चेहरा महत्वपूर्ण नहीं, लोगों के मुद्दे प्राथमिकता
Bengaluru 2nd Opposition Unity Meeting Live Updates: लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता पर जोर देने के लिए विपक्ष की बेंगलुरु में बैठक हुई। बीजेपी को टक्कर देने के लिए कांग्रेस, टीएमसी, एनसीपी, जेडीयू, आरजेडी समेत सभी बड़े दलों ने खास रणनीति पर जोर दिया।
बेंगलुरु में विपक्ष की दो दिवसीय बैठक आज खत्म हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हमारे गठबंधन को भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन कहा जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष की अगली बैठक मुंबई में होगी। इसकी तारीख की जल्द घोषणा की जाएगी।

बेंगलुरु में हो हुई विपक्ष की दूसरी महाबैठक से जुड़े हर अपडेट्स के लिए पढ़िए रहिए वनइंडिया का लाइव ब्लॉग...
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सारे विपक्षी दल संविधान और लोकतंत्र को बचाना चाहते हैं: महबूबा मुफ्ती
PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आज 26 विपक्षी दलों की बैठक हुई थी। मुल्क में जो हो रहा है वह ठीक नहीं है। हमारे संविधान, लोकतंत्र, लोगों के अधिकारों, लोगों को आपस में लड़ाने और गांधी के भारत को बदलने की कोशिश की जा रही है। इसलिए सारे विपक्षी दल इकट्ठा हुए हैं जो संविधान, लोकतंत्र को बचाना चाहते हैं।
भाजपा से लड़ने के लिए हम सब तैयार- डी राजा
सीपीआई नेता डी राजा ने कहा कि विपक्ष की बैठक में करीब 26 पार्टियां मौजूद रहीं। हमने सार्वजनिक महत्व के कई मुद्दों पर चर्चा की। हम भाजपा से मिलकर लड़ने के संयुक्त निर्णय पर पहुंचे हैं। सभी पार्टियां अब 'इंडिया' के बैनर तले हैं। समन्वय समिति बनाने जैसे कई प्रस्ताव हैं। हमारा मानना है कि देश गंभीर ख़तरे में है। बेरोजगारी, महंगाई, महिला सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
एनडीए बैठक पर क्या बोले डीके शिवकुमार
दिल्ली में एनडीए की बैठक पर कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्हें लंबे समय बाद एनडीए की याद आ रही है। पहले उन्होंने कहा था कि उन्हें एनडीए की जरूरत नहीं है, वे अकेले ही काफी हैं। लेकिन अब वे एक बैठक कर रहे हैं, जिससे पता चलता है कि कुछ गड़बड़ है।
जो हो रहा है उस पर गर्व करने का समय नहीं- महबूबा मुफ्ती
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह हमारे लिए देश में जो कुछ भी हो रहा है उस पर गर्व करने का समय नहीं है क्योंकि हमारे देश के बाहर के लोग हम पर उंगली उठा रहे हैं। इसलिए मुझे लगता है कि आज हमारा देश, न केवल आंतरिक रूप से हम एक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहे हैं, जहां हमारा अस्तित्व ही खत्म हो गया है। हमारा देश जिस पर खड़ा है, उस पर सब कुछ दांव पर है।
विपक्ष ने INDIA नाम क्यों रखा कपिल सिब्बल ने बताया
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि विपक्ष ने यह नाम (INDIA) इसलिए लिया है, क्योंकि आने वाले महीनों में यह भारत बनाम पीएम मोदी होगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष समावेशी भारत के लिए लड़ रहे हैं जो संविधान में लिखा है। कपिल सिब्बल ने वंशवादी राजनीति पर पीएम मोदी के बयान पर कहा कि पीएम मोदी कौन सी वंशवादी राजनीति की बात कर रहे हैं। क्या अरविंद केजरीवाल एक वंश के हैं या अशोक गहलोत एक वंश के हैं। ये बयान किसी भी ठोस चीज पर आधारित नहीं हैं।
यह लड़ाई BJP और उसकी विचारधारा के खिलाफ- राहुल गांधी
बेंगलुरु में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई बीजेपी और उसकी विचारधारा के खिलाफ है। यह लड़ाई भारत और नरेंद्र मोदी के बीच है। यह लड़ाई दो राजनीतिक संरचनाओं के बीच नहीं है, बल्कि लड़ाई भारत के विचार की रक्षा के लिए है। अगर आप इतिहास देखेंगे तो पाएंगे कि भारत के विचार से कोई नहीं लड़ पाया। यह भारत के विचार और नरेंद्र मोदी के बीच की लड़ाई है।
मोदी के इशारे के बिना कोई नहीं चलात- खड़गे
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आज पूरी मीडिया पर पीएम मोदी का कब्जा हो गया है। उनके इशारे के बिना कोई नहीं चलता। अपने 52 साल के सक्रिय राजनीतिक करियर में मैंने ऐसी प्रतिकूल स्थिति कभी नहीं देखी कि विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाया जा रहा हो।
विपक्षी दलों से डर रहे हैं पीएम मोदी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि एनडीए 30 दलों के साथ बैठक कर रही है। मैंने भारत में इतनी पार्टियों के बारे में नहीं सुना है। पहले उन्होंने कोई बैठक नहीं की, लेकिन अब वे एक-एक करके (एनडीए दलों के साथ) बैठक कर रहे हैं। पीएम मोदी अब विपक्षी दलों से डर रहे हैं। हम यहां लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए एकत्र हुए हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे क्या बोले बैठक में...?
सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि बेंगलुरु में संयुक्त विपक्ष की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- ''हम जानते हैं कि राज्य स्तर पर हममें से कुछ लोगों के बीच मतभेद हैं। ये मतभेद वैचारिक नहीं हैं। ये मतभेद इतने बड़े नहीं हैं कि हम आम आदमी और मध्यम वर्ग, युवाओं, गरीबों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के लिए इन्हें अपने पीछे नहीं रख सकते, जिनके अधिकारों को पर्दे के पीछे चुपचाप कुचला जा रहा है।''
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