कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किल बने अखिलेश यादव, जारी है मान मनौव्वल
नई दिल्ली। जिस तरह से हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव चुनाव के नतीजे आए और कांग्रेस ने जबरदस्त प्रदर्शन किया, उसके बाद लगातार कांग्रेस इस कोशिश में लगी है कि वह यूपी में सपा और बसपा को महागठबंधन का हिस्सा बना सके। लेकिन कांग्रेस की इन तमाम कोशिशों का खास असर होता नहीं दिख रहा है। एक तरफ जहां मायावती महागठबंधन से दूरी बनाए हुए हैं तो दूसरी तरफ अखिलेश ने भी अलग तेवर दिखाए है। दरअसल मध्य प्रदेश में अखिलेश चाहते थे कि उनके विधायक को मंत्री बनाया जाए, लेकिन जब ऐसा नहीं किया गया तो अखिलेश ने कहा कि हम कांग्रेस के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने हमारे विधायक को मंत्री नहीं बनाया ऐसा करके कांग्रेस ने यूपी में हमारे लिए रास्ता साफ कर दिया है।

कांग्रेस-सपा के बीच खींचतान
अखिलेश यादव के तेवर के बाद कांग्रेस नेता राज बब्बर ने कहा कि अखिलेश यादव के बयान में नाराजगी दिख रही है। राज बब्बर ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता आपस में बात करके मुद्दों का समाधान निकाल लेंगे। लोग चाहते हैं कि हम एक साथ मिलकर चुनाव लड़ें। गौरतलब है कि इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि सपा और बसपा एक साथ मिलकर प्रदेश में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं और वह कांग्रेस से दूरी बना सकते हैं।

सभी विकल्प खुले
मध्य प्रदेश में कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी और यहां कुल 230 विधायनसभा सीटों में से 114 सीटों पर जीत दर्ज की। लेकिन वह बहुमत का आंकड़ा नहीं छू सकी जिसकी वजह से उसे सपा और बसपा के विधायकों का समर्थन लेना पड़ा। लेकिन दोनों ही पार्टी के विधायकों को कमलनाथ ने अपने मंत्रीमंडल में शामिल नहीं किया है। अखिलेश ने इसके बाद साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों ने सपा किसके साथ हाथ मिलाएगी, कौन सपा से हाथ मिलाना चाहता है, सभी विकल्प अभी खुले हैं।

केसीआर से करेंगे मुलाकात
अखिलेश यादव ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के प्रयास की भी सराहना की है जिसमे वह कांग्रेस और भाजपा से इतर तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद में जुटे हैं। अखिलेश ने कहा कि वह दिल्ली में केसीआर से इस बार मिल नहीं पाएंगे लेकिन वह खुद तेलंगाना जाकर उनसे मुलाकात करेंगे और राजनीतिक माहौल पर चर्चा करेंगे। वहीं मायावती ने कांग्रेस से दूरी बना ली है, हालांकि उन्होंने मध्य प्रदेश में कांग्रेस को यह कहते हुए समर्थन दिया है कि वह भाजपा को सत्ता से दूर रखना चाहती हैं।
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