2G Spectrum Scam Timeline: जानिए कब और कैसे शुरु हुआ यूपीए सरकार को हिलाने वाला घोटाला
नई दिल्ली। यूपीए सरकार के दौरान 2जी घोटाले को लेकर मनमोहन सरकार को काफी किरकिरी का सामना करना पड़ा था, आज इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसका फैसला 7 नवंबर तक के लिए टाल दिया है। इस मामले की सुनवाई सीबीआई के स्पेशल जज ओम प्रकाश सैनी ने किया। बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि ओम प्रकाश सैनी ने अपने कैरियर की शुरुआत बतौर दिल्ली पुलिस में सब इंसपेक्टर के तौर पर की थी। खास बात यह है कि छह वर्ष बाद जब उन्होंने ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट की परीक्षा दी तो इस वर्ष सिर्फ एक ही व्यक्ति का चयन हुआ और वह था ओम प्रकाश सैनी का। 2जी घोटाले में बड़े नेताओं के नाम शामिल हैं, जिसमें ए राजा, कनीमोझि जैसे दिग्गज नाम जुड़े हैं। आईए डालते हैं इस घोटाले की टाइमलाइन पर एक नजर।

2G Spectrum Scam Timeline
मई 2007
ए राजा टेलीकॉम मंत्री बनाए गए
अगस्त 2007
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम ने 2जी स्पेक्ट्रम और यूएएस लाइसेंस के आवंटन की प्रक्रिया शुरू की।
25 सितंबर 2007
टेलीकॉम मंत्रालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की जिसमें निविदा भेजने की अंतिम तारीख 1 अक्टूबर 2007 बताई गई
1 अक्टूबर 2007
डीओटी को कुल 45 फर्म की ओर से 575 आवेदन प्राप्त हुए।
2 नवंबर 2007
प्रधानमंत्री ने राजा को पत्र लिखकर निष्पक्ष आवंटन के लिए कहा, साथ ही इसकी फीस की रिवाईज करने को भी कहा, लेकिन राजा ने पीएम की इस अपील को ठुकरा दिया।
22 नवंबर 2007
वित्त मंत्रालय ने डीओटी को पत्र लिखकर प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया।
10 जनवरी 2008
डीओटी ने ने पहला लाइसेंस जारी किया, जिसमे पहले आओ पहले पाओ के तर्ज पर 25 सितंबर की तारीख को स्वीकार किया गया, डीओटी ने एक पत्र जारी करके कहा कि 3.30 से लेकर 4.30 तक लाइसेंस दिए जाएंगे।
2008
स्वान टेलीकॉम, यूनीटेक एंड टाटा टेलीसर्विसेस ने अपने हिस्सेदारी का एक हिस्सा बहुत ही अधिक कीमत पर इटीस्लैट, टेलीनॉर और डोकोमो को बेच दिया।
4 मई 2009
एक एनजीओ जोकि टेलीकॉम सेक्टर पर नजर रखती है ने सीवीसी को शिकायत की जिसमें कहा गया है कि लूप टेलीकॉम को गलत तरीके से 2जी स्पेक्ट्रम आवंटित किया गया।
2009
सीवीसी ने इस मामले को सीबीआई के पास भेजा
1 जुलाई 2009
दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल जज ने स्पेक्ट्रम के लिए आवेदन की तारीख को बदले जाने को अवैध करार दिया।
21 अक्टूबर 2009
सीबीआई ने इस मामले में डीओटी के अज्ञात अधिकारियों व प्राइवेट कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की
22 अक्टूबर 2009
सीबीआई ने इस मामले में डीओटी व अज्ञात कंपनी के अधिकारियों के यहां छापेमारी शुरू की
16 नवंबर 2009
सीबीआई ने आयकर विभाग के डीजी से इस मामले में मदद मांगी। सीबीआई ने नीरा राडिया के बारे में आयकर विभाग से जानकारी मांगी, साथ ही 2जी स्पेक्ट्रम आवंटित किए जाने से जुड़े दस्तावेज भी मांगे
20 नवंबर 2009
आयकर विभाग ने जो जानकारी दी उससे यह बात निकलकर सामने आई कि अवैध तरीके से कॉर्पोरेट सेक्टर के लोगों ने डीओटी की नीतियों में फेरबदल किया, नीरा राडिया की भी भूमिका सामने आई, वह ए राजा से सीधे संपर्क में थीं।
31 मार्च 2010
सीएजी ने अपने नोट में कहा कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी
6 मई 2010
नीरा राडिया और ए राजा के बीच बातचीत का टेप सामने आया
13 सितंबर 2010
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ए राजा से 10 दिन के भीतर जवाब देने को कहा जिसमें उनपर 2008 में स्पेक्ट्रम आवंटित करने को लेकर 70,000 करोड़ रुपए का घोटाला करने का आरोप लगा।
24 सितंबर 2010
सुब्रमण्यम स्वामी ने ए राजा के खिलाफ पीएम से कार्रवाई करने की अपील की और इस बाबत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
27 सितंबर 2010
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट को इस बारे में जानकारी दी कि वह फेमा का उल्लंघन करने वाली कंपनी के खिलाफ जांच कर रही है, साथ ही कहा कि ए राजा की भूमिका के बारे में निश्चित तौर पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।
अक्टूबर 2010
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से घोटाले में सीएजी रिपोर्ट पर जवाब देने को कहा, साथ ही मामले की ढीली जांच के लिए सीबीआई को लगाई फटकार
10 नवंबर 2010
सीएजी 2जी स्पेक्ट्रम पर अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमे 1.76 लाख करोड़ के घोटाले की बात सामने आई
11 नवंबर 2010
डीओटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका शपथ पत्र दायर किया, जिसमे कहा गया कि डीओटी के पास इसका अधिकार नहीं है कि वह नीतियों के बारे में कोई फैसला ले, कैसे 2008 में नई कंपनी को अनुमति दी गई, यह उसका अधिकार क्षेत्र नहीं है।
14-15 नवंबर 2010
ए राजा ने अपने पद से दिया इस्तीफा, कपिल सिब्बल बने दूरसंचार मंत्री
10 फरवरी 2011
ए राजा को सीबीआई ने लिया हिरासत में गए जेल
17-18 फरवरी 2011
राजा को तिहाड़ जेल में भेजा गया, साथ ही बालवा को भी जेल भेजा गया।
14 मार्च 2011
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2जी मामले की सुनवाई के लिए अलग से स्पेशल कोर्ट का गठन किया।
29 मार्च 2011
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 2 अप्रैल की जगह 31 मार्च को चार्जशीट दायर करने की इजाजत दी, आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल को भी किया गया गिरफ्तार
2 अप्रैल 2011
सीबीआई ने अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की, जिसमें राजा, चंदोलिया, बेहुरा, रिलायंस एडीएजी ग्रुप के एमडी गौतम दोशी, वीपी हरि नायर, प्रेसिडेंट सुरेंद्र पिपारा, स्वान टेलीकॉम के शाहित उस्मान बलवा, विनोद गोयनका, एमडी यूनीटेक संजय चंद्र को दोषी बनाया गया। रिलायंस टेलीकॉम, स्वान टेलीकॉम, यूनीटेक वायरलेस के खिलाफ भी चार्जशीट दायर की गई।
23 अक्टूबर 2011
17 आरोंपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए।
11 नवंबर 2011
एक बार फिर से ट्रायल शुरू हुआ
23 नवंबर 2011
सुप्रीम कोर्ट ने पां उद्योगपतियों को जमानत दी, जिसमे नायर, दोशी, पिपारा, चंद्रा, गोयनका शामिल थे।
28 नवंबर 2011
दिल्ली हाई कोर्ट ने कनीमोझी, कुमार, मोरानी, आसिफ बलवा व राजीव को जमानत दी।
29 नवंबर 2011
स्पेशल कोर्ट ने शाहिद बलवा को जमानत दी
1 दिसंबर 2011
स्पेशल कोर्ट ने चंदोलिया को भी जमानत दी
12 दिसंबर 2011
सीबीआई ने तीसरी चार्जशीट दाखिल की, जिसमे एस्सार ग्रुप के प्रमोटर अंशुमान, रवि राय, विकास सराफ, लूप टेलीकॉम के किरन खेतान व उनके पति आईपी खेतान को आरोपी बनाया गया।
2 फरवरी 2012
सुप्रीम कोर्ट नेन 122 कंपनियों के लाइसेंस रद्द किया जोकि राजा के समय पर दिए गए थे। चार महीने के भीतर फिर से आवंटन करने को कहा, साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम के मुद्दे को दो हफ्ते के भीतर स्पेशल कोर्ट को फैसले देने को कहा।
2 फरवरी 2012
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 2जी मामले में चिदंबरम की जांच करने से इजाजत देने से इनकार किया, साथ ही मामले में स्पेशल कोर्ट को ही फैसले देने को कहा।
4 फरवरी 2012
सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका जिसमें उन्होंने चिदंबरम को आरोपी बनाने को कहा था उसे स्पेशल कोर्ट ने खारिज किया।
23 फरवरी 2012
स्वामी स्पेशल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए, एक एनजीओ ने भी चिदंबरम के खिलाफ जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
1 मार्च 2012
चिदंबरम और सलमान खुर्शीद की भूमिका की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, कोर्ट ने स्वीकार किया
4 अप्रैल 2012
सुप्रीम कोर्ट ने चिदंबरम मामले में सुनवाई शुरू की
24 अप्रैल 2012
चिदंबरम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा, साथ ही कहा कि चिदंबरम के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई सबूत नहीं है, लिहाजा उनके खिलाफ जांच की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
9 दिसंबर 2013
विरोध के बीच 2जी मामले में जेपीसी ने अपनी रिपोर्ट को लोकसभा में रखा
25 अप्रैल 2014
ईडी ने ए राजा और कनिमोझी के खिलाफ चार्जशीट दायर की
5 मई 2014
कोर्ट के सामने राजा का बया दर्ज हुआ, जिसमे उन्होंने कहा कि पीएम के इजाजत के बाद ही फैसला लिया गया।
31 अक्टूबर 2014
2जी मामले में आरोप तय हुए
10 नवंबर 2014
अंतिम सुनवाई 19 दिसंबर को होगी
1 जून 2015
ईडी ने कहा कि कलाईग्नार टीवी को 2जी घोटाले में 200 करोड़ मिले
19 अगस्त 2015
सीबीआई ने ए राजा के खिलाफ संपत्ति का मामला दर्ज किया
30 सितंबर 2015
सुप्रीम कोर्ट ने एस्सार प्रमोटर की याचिका को ठुकराया
3 नवंबर 2015
सुप्रीम कोर्ट ने कनिमोझी की उस याचिका को ठुकरा दिया जिसमे उनके खिलाफ आरोप को रद्द करने की मांग की गई थी
7 अक्टूबर 2016
2जी मामले में कनिमोझी की बड़ी राहत, उन्हें इस मामले से बरी किया गया
18 अप्रैल 2017
स्पेशल कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी हुई।
25 अक्टूबर 2017
9 नवंबर को कोर्ट सुनाएगा अपना फैसला
इसे भी पढ़ें- चार गुना तक बढ़ जाएगी इंटरनेट स्पीड, सरकार ने की है ये तैयारी












Click it and Unblock the Notifications