Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

कांग्रेस की औपनिवेशिक मानसिकता भारत को फिर गुलामी की ओर ना ढकेल दे! इसका रास्ता कश्मीर तो नहीं?

कांग्रेस देश के कई हिस्सों में टूटता जनाधार कांग्रेस के लिए चुनौती बना चुका है। ऐसे में ये दल अपने अस्तित्व को बचाने के जद्दोजहद में कई बार अपनी विचारधारा से भी समझौता करने के मजबूर हो जाती है। जम्मू कश्मीर की सत्ता में आने के लिए लालयित कांग्रेस- नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन कोई अजूबा नहीं है, इससे पहले भी कांग्रेस की कुछ ऐसी ही मानसिकता का देश को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा।

जम्मू कश्मीर चुनाव में जब कांग्रेस ने अलगाववाद की बुनियाद पर टिकी नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ हाथ मिलाया तो वे ये भूल गई कि देश की आजादी और और उसे अक्षुण्य बनाए रखने के लिए कितनों ने अपने प्राणों की आहुति दी। आजादी के बाद भी रियासतों में बने भारत को अखंड भारत बनाने के लिए हमारे महापुरुषों ने कितने योगदान दिए। लगातार कांग्रेस पर आखिर औपनिवेशिक मानसिकता के आरोप क्यों लगत रहे, ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है। भारत में पाश्चत्य सभ्यता का विकास कब और कैसे हुआ, ये किसकी देन हैं।

Colonial mentality of Congress

भारत के संविधान तक में औपनिवेशिक काल के विचारधारा का असर क्यों दिखाई देता है? ऐसे कई सारे सवाल हैं, जिनका जवाब जब भी मांगा जाएगा तो कांग्रेस से, क्योंकि देश की आजादी के बाद से लगातार कई दशकों तक केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार रही। लेकिन 2014 में एनडीए के आने के बाद लगातार जब कांग्रेस के वोट शेयर घटते गए तो 2024 में परस्पर विरोधी दलों के साथ मिलकर कांग्रेस ने एक बार फिर से सत्ता में आने के लिए आईएनडीआईए गठबंठन खड़ा किया।

कांग्रेस के नेतृत्व बना आईएनडीआईए गठबंधन में शामिल दलों की विचारधारा पर अगर नजर डाली जाए तो काफी विरोधाभास नजर आता है। राजनीतिक विश्लेषकों ने लोकसभा चुनाव 2024 के पूर्व में इस बात के संकेत दिए थे अगर ये दल सत्ता में आता है तो भारत को एक अस्थिर सरकार मिलेगी। अब कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर में कुर्सी पाने के लिए नेशनल कांफ्रेंस से हाथ मिलाया तो फिर एक बार से इस दल की मानसिकता को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

ये पहला मौका नहीं है, जब कांग्रेस पर इस तरह के आरोप लग रहे हैं। इससे पहले उत्तर और दक्षिण के बीच विभाजन और जातीय कलह पैदा करने के भी आरोप लगे हैं। पूर्व में सैम पित्रोदा के बयान के कांग्रेस की जमकर किरकिरी हुई थी।

कांग्रेस पर देश की सेवा के बहाने देश पर कर्ज का बोझ लादने के अलावा वक्फ बोर्ड की तरह जमीनों पर कब्जा कर अपने संस्थानों को खड़ा करने जैसे कई गंभीर आरोप हैं।

अब जम्मू कश्मीर में चुनाव के दौरान कांग्रेस ने एक अलगाववादी पार्टी के साथ हाथ मिलाया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं, कि पूर्व में जिस तरह घाटी को सिर्फ और सिर्फ आतंकी घटनाओं को लिए जाना जाता था, और ये स्थान राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को गढ़ था, क्या अब फिर से एक बार यहां पुराना इतिहास दोहराया जाएगा।

सवाल ये भी है क्या कांग्रेस कश्मीर में अलगाववाद के जरिए सत्ता की लालच में देश विरोधी ताकतों को बढ़ावा देने का ताना-बाना तो नहीं बुन रही है। अनजाने में ही सही लेकिन अगर सत्ता पाने के लिए इस तरह के रास्ते किसी भी मायने में सही नहीं कहे जा सकते है। हालांकि गठबंधन भी शर्तों पर होते हैं, लेकिन पार्टी अपनी विचारधारा और सरकार संविधान के अनुरूप काम करती है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+