'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर चर्चा में आईं कर्नल सोफिया कुरैशी, पहले भी बटोर चुकी हैं सुर्खियां, SC ने की थी तारीफ
Colonel Sofiya Qureshi: भारतीय सेना में कई बहादुर महिलाएं हैं, जिन्होंने अपने साहस और समर्पण से देश का नाम रोशन किया है। इन्हीं में से एक नाम है कर्नल सोफिया कुरैशी का। हाल ही में जब 'ऑपरेशन सिंदूर' की प्रेस ब्रीफिंग हुई, तो उनकी मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा।
एक महिला अधिकारी के तौर पर उन्होंने जिस आत्मविश्वास और सटीकता से मीडिया के सामने जानकारी साझा की, वह हर किसी को प्रेरित करने वाली थी। लेकिन कर्नल सोफिया की यह कामयाबी एक दिन में नहीं मिली। इसके पीछे एक लंबा संघर्ष, मजबूत इरादे और मेहनत भरा सफर है।

यह वही सोफिया हैं, जिन्हें 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने ऐतिहासिक फैसले में खासतौर पर सराहा था। वे सिर्फ सेना की एक अधिकारी नहीं, बल्कि उन चुनिंदा महिलाओं में शामिल हैं जिन्होंने भारतीय सेना में लीडरशिप की मिसाल पेश की है - एक ऐसी मिसाल, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। आइए जानते हैं इस बारे में पूरी डिटेल...
सुप्रीम कोर्ट में हुई थी सोफिया की तारीफ
साल 2020 में जब सुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का बड़ा फैसला सुनाया था, तब कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम भी सामने आया था। कोर्ट ने अपने फैसले में उन्हें विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि वह 'एक्सरसाइज फोर्स 18' नामक अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारतीय दल का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं।
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संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी निभाई अहम भूमिका
कर्नल सोफिया ने 2006 में कांगो में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में भी हिस्सा लिया था। वहां वह युद्ध प्रभावित इलाकों में शांति बनाए रखने और मानवीय सहायता पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में जुटी थीं।
छतरपुर के नौगांव से है गहरा नाता
सोफिया कुरैशी का बचपन मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव में बीता। उन्होंने नौगांव के एक सरकारी स्कूल में कक्षा 1 से 3 तक पढ़ाई की। एक वीडियो में सोफिया ने खुद बताया था कि उनके पिता और दादा दोनों भारतीय सेना में थे। उनकी परदादी ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के साथ लड़ाई में भाग लिया था जिसकी जानकारी खुद सोफिया ने एक वीडियो में दो थी। सोफिया का परिवार बाद में पुणे चला गया, जहां सोफिया और उनकी बहन सायना का जन्म हुआ।
कर्नल बनने के बाद दो बार आईं नौगांव
कर्नल बनने के बाद जब सोफिया की पोस्टिंग बबीना (झांसी) में थी, तब वह दो बार नौगांव आईं। उनके रिश्तेदार बताते हैं कि वह आज भी नौगांव को नहीं भूली हैं। 11 जनवरी को नौगांव के स्थापना दिवस पर वह हर साल शुभकामनाएं भेजती हैं।
सेना की परंपरा से जुड़ा है परिवार
सोफिया का परिवार लंबे समय से सेना से जुड़ा रहा है। उनके दादा मोहम्मद हुसैन कुरैशी और पिता ताज मोहम्मद कुरैशी दोनों सेना में थे। बाद में उनके पिता की पोस्टिंग रांची और फिर वडोदरा में हुई, जहां वे सेवानिवृत्त हुए और परिवार के साथ बस गए।
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