रेत पर होगा अगला महाकुंभ! थ्री इडियट्स वाले वैज्ञानिक ने बजाई खतरे की घंटी, PM को खत लिखकर की यह मांग
Sonam Wangchuk On Next Mahakumbh: प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 का बुधवार महाशिवरात्रि को आखिरी दिन है। 13 जनवरी से शुरू हुए आस्था के इस संगम में अब तक 61 करोड़ से ज्यादा लोगों ने त्रिवेणी में डुबकी लगाई है। ऐसे में आज यानी 26 फरवरी को 144 साल बाद आया महाकुंभ समाप्त होने जा रहा है। इस बीच जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अगले महाकुंभ को लेकर पीएम मोदी को खुला पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने हैरान कर देने वाली आशंका जताई है।
प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर हिमालय के तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के संरक्षण की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 144 वर्षों के बाद होने वाला अगला महाकुंभ रेत पर आयोजित हो सकता है, क्योंकि देश की प्रमुख नदियां सूख सकती हैं।

Mahakumbh: महाकुंभ को लेकर वांगचुक की मोदी से अपील
वांगचुक ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से हिमालयी ग्लेशियरों की स्थिति का आकलन करने के लिए एक विशेष आयोग गठित करने की मांग की। उन्होंने लिखा, "भारत को ग्लेशियर संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए क्योंकि हमारे पास हिमालय है और यहीं से गंगा व यमुना जैसी नदियाँ निकलती हैं।"
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी नदियां मौसमी जल स्रोतों में बदल सकती हैं। वांगचुक ने चेतावनी देते हुए कहा, "यदि वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन की वर्तमान दर जारी रही, तो हमारी पवित्र नदियां सूख सकती हैं और भविष्य में महाकुंभ केवल रेतीले अवशेषों के बीच मनाया जाएगा।"
AND FINALLY BACK IN INDIA
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) February 25, 2025
Concluded the 12 day #TravellingGlacier #ThankYou tour in New Delhi with a Press Conference & an open letter to the honourable Prime Minister of India #SaveGlaciers #SaveThePlanet#SaveLadakh #SaveHimalayas#ClimateAction #ClimateEmergency… pic.twitter.com/aMJum0h1UV
स्थानीय समुदायों में जागरूकता की कमी
अपने पत्र में वांगचुक ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि जमीनी स्तर पर लोगों में इस मुद्दे को लेकर जागरूकता की भारी कमी है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए और स्थानीय समुदायों को जलवायु परिवर्तन के खतरों से अवगत कराना चाहिए।
ग्लेशियर संरक्षण पर अंतर्राष्ट्रीय पहल
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने 2025 को "ग्लेशियर संरक्षण का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष" घोषित किया है। वांगचुक ने इस वैश्विक पहल को ध्यान में रखते हुए भारत को ग्लेशियर संरक्षण का नेतृत्व करने की अपील की।
महाकुंभ और संभावित खतरे
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संगम के तट पर 13 जनवरी से शुरू हुआ महाकुंभ आज समाप्त हो रहा है। संगम वह स्थान है जहां गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों का मिलन होता है। यदि ग्लेशियरों के पिघलने की दर इसी तरह जारी रही, तो भविष्य में महाकुंभ के लिए प्रयाप्त जल उपलब्ध रहना भी एक गंभीर चुनौती बन सकता है।
वांगचुक ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर लद्दाख के जलवायु-प्रभावित लोगों की ओर से एक बर्फ का टुकड़ा भेंट करने की इच्छा भी जताई, जिससे इस संकट की गंभीरता को उजागर किया जा सके।












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