Kerala: गोपन स्वामी का शव निकालकर पोस्टमार्टम करवाने पहुंची पुलिस, परिवार ने जताया समाधि से छेड़छाड़ का विरोध
Kerala: केरल के तिरुवंतपुरम में नेय्यात्तिंकारा के कवुविलाकम में सोमवार को 69 वर्षीय गोपन स्वामी की कथित समाधि और संदिग्ध दफनाने को लेकर नाटकीय घटनाक्रम सामने आया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शव निकालने के प्रयासों का स्वामी के परिवार और स्थानीय निवासियों ने विरोध किया।
पुलिस और परिवार के बीच तीखा टकराव
नेय्यात्तिंकारा डिप्टी एसपी के नेतृत्व में पुलिस दल ने शव को निकालने के लिए गोपन स्वामी के निवास पर कार्रवाई शुरू की। तिरुवनंतपुरम के उप-कलेक्टर अल्फ्रेड ओवी ने परिवार को राजस्व प्रभागीय अधिकारी द्वारा शव निकालने के आदेश के बारे में सूचित किया। हालांकि गोपन स्वामी के बेटे राजसेनन और अन्य परिवार के सदस्यों ने इस कार्यवाही का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि हम किसी भी कीमत पर समाधि को छेड़ने नहीं देंगे।

स्वामी की पत्नी सुलोचना ने पास में बैठकर ओम नमः शिवाय का जाप किया। जबकि उनके दूसरे बेटे संतथन ने पुलिस के साथ तीखी बहस की। अधिकारियों के दबाव के बावजूद बढ़ते विरोध को देखते हुए पुलिस ने फिलहाल शव निकालने की कार्रवाई स्थगित कर दी।
स्थानीय समुदाय का समर्थन और कानूनी पहलू
परिवार को स्थानीय निवासियों और वैकुण्ठ स्वामी धर्म प्रचारण सभा जैसे संगठनों का व्यापक समर्थन मिला। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को पारिवारिक धार्मिक मान्यताओं में हस्तक्षेप बताया। परिवार के वकील ने कहा कि दफनाने की यह जगह परिवार के लिए पवित्र है। यह उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
वकील ने यह भी आरोप लगाया कि आरडीओ पुलिस के दबाव में काम कर रहे हैं। बढ़ते विरोध के बीच अधिकारियों ने कार्यवाही को फिलहाल रोकने का फैसला लिया।
पुलिस जांच और संदिग्ध परिस्थितियां
नेय्यात्तिंकारा पुलिस को स्थानीय शिकायतों के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में गोपन स्वामी के दफनाए जाने की सूचना मिली। शिकायतों में उनकी मौत से जुड़े अनियमितताओं का आरोप था। पुलिस ने एक लापता व्यक्ति का मामला दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग की। गोपन स्वामी के घर के पास लगे पोस्टरों पर लिखा था कि गोपन स्वामी ने समाधि प्राप्त की है। इस घोषणा ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया।
विरोधाभासी दावे, समाधि या बीमारी से मौत
गोपन स्वामी के बेटे राजसेनन ने दावा किया कि उनके पिता ने शुक्रवार रात 11:30 बजे समाधि में प्रवेश किया। उन्होंने मीडिया को बताया कि पिता ने हमें निर्देश दिया था कि उनके शरीर को सार्वजनिक रूप से न दिखाया जाए और उन्हें उनके विशेष दफनाने की जगह पर दफनाया जाए। हालांकि पड़ोसियों ने दावा किया कि गोपन स्वामी लंबे समय से बीमार थे और बिस्तर पर थे। गोपन स्वामी जो एक पुजारी और मंदिर के संस्थापक थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में खुद को दफनाने के लिए विशेष जगह का निर्माण किया था।
अधिकारियों का अगला कदम
पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए शव का पोस्टमार्टम आवश्यक है। आरडीओ की मौजूदगी में खुदाई की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता और विरोध को देखते हुए प्रशासन ने सामुदायिक नेताओं और परिवार के साथ चर्चा के बाद आगे की कार्यवाही का आश्वासन दिया है।
समाज में गूंजता सवाल
गोपन स्वामी की कथित समाधि ने धार्मिक आस्थाओं और कानूनी प्रक्रिया के बीच टकराव को उजागर किया है। यह मामला स्थानीय समुदाय और प्रशासन के लिए एक चुनौतीपूर्ण संतुलन बन गया है।












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