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मोदी सरकार के इन कदमों ने हवाई यात्रा को आम आदमी के लिए बना दिया आसान

नई दिल्लीः पिछले चार सालों में भारत में सिविल एविएशन इंडस्ट्री में काफी बढ़ोतरी हुई। सिविल एविएशन इंडस्ट्री को देश की सबसे ज्यादा बढ़ने वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। सिविल एविएशन इंडस्ट्री के लिए विकास के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। देश के अलग-अलग एयरपोर्ट्स पर आ रही समस्याओं को दूर किया गया, छोटे शहरों में हवाई जहाज की सुविधा को चालू किया गया।

हवाई जहाज से यात्रा करने वाले लोगों में हुई बढ़ोतरी

हवाई जहाज से यात्रा करने वाले लोगों में हुई बढ़ोतरी

मोदी सरकार के चार सालों में हवाई जहाज से यात्रा करने वाले लोगों की संख्या में 18 से 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। दुनिया में अब भारत सिविल एविएशन इंडस्ट्री में तीसरे नंबर पर आता है। एक आकंडे़ के अनुसार, ट्रेनों के एसी डिब्बों में सफर करने वाले लोगों से ज्यादा लोग हवाई जहाजों में सफर करते हैं।

हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 'UDAN' नाम की योजना लॉन्च की

हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 'UDAN' नाम की योजना लॉन्च की

18-20 प्रतिशत की सीमा में बढ़ रहे हवाई यात्री यातायात के साथ तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार के रूप में उभरा है, और इसमें भी बढ़ती संख्या देखी गई है देश में फ्लायर। अब, हवाई यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और भारतीय रेलवे एसी कोच में यात्रा करने वालों की तुलना में पहले से ही अधिक उड़ानें हैं। इस सफलता के पीछे सिविल एविएशन मंत्रालय का बहुत बड़ा हाथ रहा है। मंत्रालय ने इसके लिए काफी मेहनत की है। 21 अक्टबूर 2016 को मंत्रालय ने छोटे शहरों में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 'UDAN' नाम की योजना लॉन्च की। मंत्रालाय ने दावा किया है कि इस योजना से देश के करीब 100 से ज्यादा हवाई अड्डों को दोबारा चालू किया।

कई शहरों के एयरपोर्ट को इंटरनेशल एयरपोर्ट घोषित किया गया

कई शहरों के एयरपोर्ट को इंटरनेशल एयरपोर्ट घोषित किया गया

साथ ही कई शहरों के एयरपोर्ट को इंटरनेशल एयरपोर्ट भी घोषित किया, जिनमें भोपाल, इंदौर, रायपुर जैसे घरेलू एयरपोर्ट शामिल थे। इंटरनेशल एयरपोर्ट घोषित किए जाने के बाद इस एयरपोर्ट पर कई तरह की सुविधाएं बढ़ी। 9 000 फीट का रनवे बनाया गया। साथ ही रात में हवाई जहाज की लैंडिंग के लिए नया सिस्टम तैयार किया गया। एयरपोर्ट पर उपकरण लैंडिंग सिस्टम और सीमा शुल्क, स्वास्थ्य सेवा आदि की शुरुआत की गई। दिल्ली, कोच्चि और हैदराबाद हवाई अड्डों को ग्रीन एनर्जी ऊर्जा में बदली कियी गया। दो मेगा वोट सोलर पॉवर पाने वाला दिल्ली का एयरपोर्ट देश का पहला हवाई अड्डा बना। इसके बाद कोच्चि का हवाई अड्डा भी सोलर पैनलों के साथ 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा से चलता है। अगर दिल्ली एयरपोर्ट की बात की जाए तो एयरपोर्ट के रनवे पर अतिरिक्त सौर पैनल रखे गए हैं। हैदराबाद के हवाई अड्डे के पास पर्याप्त जमीन हैं, इसलिए वहां भी सोलर एनर्जी का काम किया जा रहा है। सिविल एविएशन मंत्रालय ने नई पॉलिसी भी बनाई है, जिसके बाद छोटे शहरों के साथ कनेक्टिविटी बढ़ेगी। SAARC देशों के साथ कई तरह के प्लान बनाए गए हैं।

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