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चुनावी किस्से: कांग्रेस से नाराज देव आनंद ने बनाई थी अपनी पार्टी, लोगों का समर्थन देख हैरान हुईं इंदिरा गांधी

लोकसभा चुनाव 2024 की शुरुआत हो चुकी है। इस बार भी चुनावों में बॉलीवुड हस्तियों की उपस्थिति देखने को मिल रही है। हाल ही में बीजेपी ने बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत को हिमाचल की मंडी लोकसभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

कंगना के अलावा चर्चित सीरियल रामायण में राम का किरदार निभाने वाले एक्टर अरुण गोविल, भोजपुरी एक्टर रवि किशन, शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा और बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी भी चुनाव लड़ रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि बॉलीवुड और राजनीति का रिश्ता काफी पुराना है।

Dev Anand formed his own political party

फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों का चुनाव लड़ना सामान्य बात है लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एक समय में फिल्मी सितारों ने खुद की राजनीतिक पार्टी भी बनाई थी। उस समय सबसे बड़े स्टारों में से एक रहे देव आनंद को इस पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया था।

इस राजनीतिक पार्टी का नाम 'नेशनल पार्टी ऑफ इंडिया' था। इसका गठन देवानंद साहब ने इमरजेंसी के भयानक दौर के तुरंत बाद यानी साल 1979 में किया था। इस पार्टी में देव आनंद और उनके भाई विजय आनंद के अलावा निर्माता-निर्देशक वी. शांताराम, जीपी सिप्पी, श्रीराम बोहरा, आइएस जोहर, रामानंद सागर, आत्माराम, शत्रुघ्न सिन्हा, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, साधना, संजीव कुमार, प्राण जैसे अनेक सितारों के साथ बड़ी संख्या में लोग जुड़े थे।

देवानंद ने अपनी पार्टी क्यों बनाई?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 1976 में किसी सभा में कांग्रेस की तरफ से गुजारिश की गई थी कि वो संजय गांधी की तारीफ में कुछ शब्द कहें। देवानंद ने इस अनुरोध को अनसुना कर दिया। वो दौर इमरजेंसी का था, देवानंद की ठसक कांग्रेस को चुभ गई। देवानंद की फिल्मों और गानों को दूरदर्शन पर दिखाना बंद कर दिया गया। ऑल इंडिया रेडियो पर भी उनकी फिल्मों के गानों पर बैन लग गया।

देवानंद को राजनीति में लाए रामजेठमलानी

जब आपातकाल खत्म हुआ तो 1977 में संसदीय चुनावों की घोषणा हुई। तब देश के जाने-माने वकील रामजेठमलानी ने देवानंद को न्योता भेजा गया कि वो जनता पार्टी के उस अभियान का हिस्सा बनें जो इंदिरा और संजय गांधी के खिलाफ था। कांग्रेस से पहले से नाराज ने सहज ही ये मांग मान ली और वे कांग्रेस विरोधी नेताओं के संग मंच साझा करने लगे।

जनता पार्टी से निराश हुए देवानंद

विपक्षी पार्टियों की एकता काम आई और 77 में जनता पार्टी की सरकार बन गई। लेकिन, आंतरिक कलह के कारण कुछ ही सालों के बाद मोरारजी देसाई को पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा। देवानंद इस बात से निराश हो गए और उनका इन नेताओं से मोहभंग हो गया।

इसके बाद देवानंद ने खुद अपनी पार्टी बनाने का निर्णय किया। इसके बाद देवानंद ने कुछ लोगों को लोकसभा चुनाव लड़ने का टिकट भी दिया गया। इस पार्टी की रैली मुंबई के शिवाजी पार्क में हुई थी, जिसमें इतनी भीड़ आ गई कि बाकी राजनीतिक पार्टियों को ये खतरे की घंटी लगने लगी।

सफल नहीं हो पाए देवानंद

इसके बाद जनता सरकार और कांग्रेस दोनों ने ही देवानंद की पार्टी से जुड़े अभिनेताओं को धमकाना शुरू कर दिया। वरिष्ठ नेताओं ने फिल्मी हस्तियों को नसीहत दी है कि अगर वे फिल्म इंडस्ट्री को चुनाव के बाद आने वाली मुश्किलों से बचाना चाहते हैं तो उन्हें यह तमाशा बंद करना होगा। इसके बाद देवानंद की पार्टी से लोगों ने किनारा करना शुरू कर दिया। कहा जाता है कि लोगों से मिल रहे भारी समर्थन को देख तब इंदिरा गांधी भी हैरान हो गई थीं।

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