चिराग पासवान को एक और बड़ा झटका, एलजेपी के अध्यक्ष पद से भी हटाए गए
चिराग पासवान को एक और बड़ा झटका, एलजेपी के अध्यक्ष पद से भी हटाए गए
नई दिल्ली, 15 जून: चिराग पासवान को लोकजन शक्ति पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। चिराग पासवान को हटाकर सूरजभान सिंह को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। मंगलवार को चिराग पासवान के चाचा और पार्टी सांसद पशुपति कुमार के घर पर हुई एलजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ये फैसला लिया गया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सूरजभान सिंह को कार्यकारी अध्यक्ष चुनते हुए उनको नया राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद के लिए चुनाव कराने की जिम्मेदारी भी दी है। एक दिन पहले लोजपा सांसदों ने चिराग पासवान को लोकसभा में नेता के पद से हटाकर पशुपति पारस को संसदीय दल का नया नेता चुना है।

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बिहार में प्रभाव रखने वाली लोक जन शक्ति पार्टी में बीते दो दिनों में बड़ी हलचल देखने को मिली है। पार्टी के छह में से पांच सांसदों ने पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान से बगावत की है। बिहार के हाजीपुर से सांसद और चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस की अगुवाई में ये बगावत हुई है। सोमवार को पहले पार्टी सांसदों ने चिराग पासवान को लोकसभा में नेता के पद से भी हटाया। इसके बाद पशुपति कुमार पारस को सर्वसम्मति से लोकसभा में लोक जनशक्ति पार्टी संसदीय दल का नेता चुना गया। वहीं अब पार्टी के अध्यक्ष पद से भी चिराग को हटा दिया है। लोकजनशक्ति पार्टी के संस्थापक पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की मौत के बाद पार्टी का नेतृत्व कर रहे उनके बेटे चिराग पासवान अब पार्टी में एकदम अकेले और कमजोर हो गए हैं। रामविलास पासवान के बाद से अभी तक वही पार्टी के सबसे बड़े नेता औरचेहरा थे।
लोकजन शक्ति पार्टी के छह लोकसभा सांसद हैं। इसमें एक पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान भी हैं। चिराग को छोड़ बाकी सभी सांसद पशुपति कुमार पारस, चौधरी महबूब अली कैसर, वीणा देवी, चंदन सिंह और फ्रिंस राज ने पशुपति पारस को अपना नेता माना है।
पशुपति पारस चिराग से मिले तक नहीं
सोमवार को चिराग पासवान ने दिल्ली में पशुपति पारस के घर पहुंचकर उनसे मिलने की कोशिश की थी। हालांकि चिराग को करीब एक घंटे इंतजार करान के बाद भी पशुपति पारस ने उनसे मुलाकात नहीं की।
बिहार के जमुई से सांसद चिराग पासवान ने कहा है कि उन्होंने पार्टी को एकजुट रखने की हर मुमकिन कोशिश की थी। वहीं पशुपति पारस का कहना है कि पार्टी को बचाने के लिए ये जरूरी थी क्योंकि चिराग के नेतृत्व में सब ठीक नहीं चल रहा था।












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