अरुणाचल बॉर्डर तक चीन ने बनाई पैठ, अरबों खर्च कर बनाया हाई-वे
डोकलाम पर कई हफ्तों तक चला टकराव आज भले ही शांत हो गया है, लेकिन चीन अब अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। ताजा खबर तिब्बत से जहां चीन एक नया 409 किलोमीटर लंबा हाई-वे तैयार कर दिया है। वैसे तो अपने देश की सीमा किसी भी देश के लिए हाई-वे बनाना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन चीन का यह हाई-वे भारत के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन ने यह हाई-वे तिब्बत की राजधानी ल्हासा से निंगची तक बनाया है, जो कि अरुणाचल प्रदेश के बॉर्डर के बेहद करीब है।

5.8 करोड़ डॉलर की लागत से तैयार इस हाई-वे
टूरिज्म को प्रमोट करने के मकसद से बनाया गया है। ऐसा कहना है चीन सरकार का, लेकिन पूरा सच यह नहीं है। भारत के लिए जो चिंता की बात है वो यह है कि इस हाई-वे का इस्तेमाल चीनी सेना भी कर सकती है। तिब्बत में चीन खुद को लगातार मजबूत कर रहा है।
डोकलाम विवाद के दौरान चीनी सेना ने जिस इलाके में सबसे ज्यादा युद्धाभ्यास किया था वो तिब्बत ही था। भारतीय सेना भी इस बात को बखूबी समझती है, यही कारण है कि अरुणाचल के इलाके में भारत लगातार सैन्य ताकत बढ़ा रहा है।
कुछ दिन पहले खोला था नेपाल तक हाई-वे
चीन ने हाल ही में नेपाल तक हाई-वे शुरू किया है। यह राजमार्ग तिब्बत की राजधानी ल्हासा को नेपाल सीमा पर स्थित झांगमू से जोड़ेगा। यह हाई-वे एक ओर नेपाल सीमा से जुड़ता है तो दूसरी ओर से तिब्बत स्थित निंगची को जोड़ता है, जो अरुणाचल प्रदेश की सीमा के बेहद निकट है। यह हाई-वे भारतीय सीमा के काफी करीब से होकर जाएगा। इस हाइ-वे को सेना के वाहन चल सकेंगे और सैन्य उद्देश्यों से विमानों के टेक ऑफ के लिए इसे रनवे के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। मतलब आप समझे नेपाल को ल्हासा से जोड़ने वाला यह वही हाई-वे है जो कि अरुणाचल बॉर्डर के करीब तक गुजरता है।












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