चीन ने दिखाया असली चेहरा, कोविड संकट में मदद का दिखावा दूसरी तरफ लद्दाख में चल रहा चाल
नई दिल्ली, अप्रैल 30। देश भर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर सुनामी में बदल चुकी है। कोरोना वायरस के चलते मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। देश में कोविड-19 के मरीजों के लिए ऑक्सीजन और दवाओं की भारी कमी हो गई है। पूरा देश कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच कराह रहा है। लेकिन इसी बीच पड़ोसी चीन इस मौके का फायदा उठाकर अपनी कुटिल चाल चलने में जुट गया है। एक तरफ जहां देश कोरोना वायरस के मरीजों से जूझ रहा है उसी समय सामने आया है कि चीन खामोशी से पूर्वी लद्दाख में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा हुआ है।

लद्दाख में स्थिति मजबूत करने में जुटा चीन
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक एक तरफ जहां दोनों देशों के बीच एलएसी पर स्थिति को अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति में लाने के लिए बातचीत चल रही है उसी समय पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सर्दियों के मुकाबले स्थायी आवास और डिपो के साथ पूर्वी लद्दाख के अंदर वाले क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है।
करीब साल भर से चल रहे गतिरोध के बाद इस साल की फरवरी में पहली राहत भरी खबर आई थी जब दोनों पक्षों ने पैंगोंग त्सो झील के किनारे से डिसएंगेजमेंट पर सहमति जताई थी। इसके बाद जब दोनों सेनाओं के पीछे हटने की तस्वीरें सामने आईं तो पहली बार लगा कि धीरे-धीरे ही सही अब ऐसा माहौल तैयार हुआ है जिससे बाकी क्षेत्रों में डिएस्केलेशन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी लेकिन अब अक्साई चिन के ठीक उत्तर में कांग्जीवर और तिब्बत लद्दाख फ्रंटियर में स्थित रुडोक में चीन के स्थायी आवास ने एक बार फिर खतरे की घंटे बजा दी है।

चीन ने दिखाया असली चेहरा
भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के साथ ग्राउंड इंटेलिजेंस और तस्वीरों के अध्ययन से ये पता चलता है कि पीएलए एलएसी पर लंबे समय तक टिकने की तैयारी के साथ यहां पर मौजूद है। खास बात ये है कि ये जानकारी ऐसे समय में आई है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत में हो रही मौतों को लेकर मदद का हाथ बढ़ाते हुए कहा है कि "महामारी के खिलाफ इस लड़ाई में बीजिंग भारत के साथ सहयोग को मजबूत करने और इस संबंध में सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। मेरा मानना है कि भारत सरकार के नेतृत्व में भारतीय लोग निश्चित रूप से महामारी पर विजय प्राप्त करेंगे।"
एक तरफ तो भारत के लिए संवेदना जताना और दूसरी तरफ मौके का फायदा उठाकर सीमा पर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुट जाना, साम्यवादी चीन का दरअसल यही चाल, चरित्र और असली चेहरा है।
इंडिया टुडे ने तस्वीरों के अध्ययन के बाद बताया है कि अक्साई चिन के उत्तर में स्थायी संरचनाओं, आवास और सैन्य निर्माण के साथ चीन ने शीतकालीन तैनाती की स्थिति को सुदृढ़ किया है जिसमें भारत-चीन के बीच तनाव वाले क्षेत्र शामिल हैं।

आसानी से हटने के मूड में नहीं ड्रैगन
जिन क्षेत्रों में पीएलए ने निर्माण किया है उनमें शिनजियांग स्वायत्त क्षेत्र के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में स्थित जाईदुल्ला, लद्दाख की चिप चैप घाटी से कुछ दूरी पर स्थिति पिउ में एक मजबूत चीनी रडार स्थल, हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा पोस्ट से एलएसी के किरमगो ट्रेगर में सैन्य चौकी स्थापित की है।
खुफिया जानकारी के आधार पर ये पता चला है कि कांग्जीवर और रुडोक में 10000 चीनी सैनिकों की तैनाती को अतिरिक्त 10,000 स्थायी सैनिकों के साथ जोड़ा है।
चीन की स्थिति पर नजर डालने पर पता चलता है कि ड्रैगन एलएसी से हटने के मूड में नहीं है। खास बात यह है कि पीएलए ने पैंगोंग झील के दक्षिण में स्थित स्पांगुर त्सो की गहराई वाले क्षेत्रों में स्थायी निर्माण किया गया है। यह कैलाश रेंज के उस सेक्टर से सटा हुआ है जहां पिछले साल भारत ने सामरिक लाभ हासिल किया था।

लद्दाख में तनाव के एक साल
भारतीय सैन्य और खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि गहराई वाले क्षेत्रों में चीन का शांत लेकिन आक्रामक निर्माण वाला रवैया 9 अप्रैल को अंतिम दौर की वार्ता के कुछ सप्ताह बाद ही आया है। इस सैन्य वार्ता में चीन ने हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा पोस्ट समेत किसी भी तनाव वाले क्षेत्रों में चर्चा से इनकार कर दिया था।
5 मई आने के साथ ही भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में तनाव को एक साल पूरे हो रहे हैं। पैंगोंग झील के किनारे पर सैनिकों के आमने-सामने जुटने से शुरू हुआ ये तनाव जल्द ही गलवान घाटी, गोगरा पोस्ट और हॉट स्प्रिंग्स के इलाके में फैल गया था। गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था जिसमें भारत के कई जवानों की अपनी जान गंवानी पड़ी थी। शुरुआती चुप्पी के बाद में चीन ने भी अपने सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकार की थी।












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