ड्रैगन की नई चाल का खुलासा: LAC के पास चीन बना रहा कंक्रीट के स्थायी सैन्य शिविर

15 जुलाई, नई दिल्ली। एक तरफ चीन भारत से विवाद को लेकर बात कर रहा है दूसरी तरफ वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास चीन की एक और चाल का खुलासा हुआ है जिसमें पता चला है कि चीन एलएसी के बेहद ही करीब अपनी सेना के लिए स्थायी सैन्य शिविर बना रहा है। जानकारी के मुताबिक चीन नाकू-ला और पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास कंक्रीट के सैन्य शिविर बना रहा है। आशंका जताई जा रही है कि चीन एक बार फिर घुसपैठ की तैयारी कर रहा है जिसके बाद खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर आ गई हैं।

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    एलएसी से कुछ किलोमीटर की दूरी पर शिविर

    एलएसी से कुछ किलोमीटर की दूरी पर शिविर

    सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने एएनआई को बताया कि चीन उत्तरी सिक्किम क्षेत्र में नाकू ला क्षेत्र के दूसरी तरफ चीनी क्षेत्र के अंदर एलएसी से कुछ किलोमीटर की दूरी पर सैन्य शिविर बना रहा है। यह जगह उस क्षेत्र से कुछ मिनटों की दूरी पर ही है जहां पर पिछले साल और इस साल जनवरी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव हुआ था।

    सूत्रों ने कहा "चीनी स्थायी कंक्रीट के ढांचे का निर्माण कर रहे हैं जो जिसमें एलएसी के पास सैनिकों को तैनात किया जा सकेगा। साथ ही इस जगह पर सड़क पर बुनियादी ढांचा भी बहुत अच्छा है जो पीएलए को भारत से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में पहले की अपेक्षा पहले से अधिक तेजी से पहुंचने में मदद करेगा।

    चीन की लंबे समय तक टिकने की मंशा

    चीन की लंबे समय तक टिकने की मंशा

    सूत्रों ने कहा कि इन आधुनिक ढांचों का निर्माण पूर्वी लद्दाख के क्षेत्रों के साथ-साथ अरुणाचल क्षेत्र में भी देखा गया है। ये निर्माण चीनी सेना को सर्दियों के दौरान अग्रिम इलाकों में अपने सैनिकों को समस्या से निपटने में मदद करेगा। पूर्वी लद्दाख की अंग्रिम पंक्ति वाले इलाके में भयंकर सर्दी पड़ती है जिसके चलते यहां पर पिछली तैनाती के दौरान चीनी सैनिकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। भयंकर सर्दी के चलते चीन को अपनी 90 प्रतिशत सैन्य शक्ति को वहां से हटाना पड़ा था।

    सीमावर्ती इलाकों में स्थायी ढांचों का निर्माण ये दिखाता है कि चीन यहां पर लंबे समय तक टिके रहने के इरादे से तैयारी कर रहा है।

    इसी साल फरवरी में जिस पैंगोंग झील इलाके से डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया के तहत भारत और चीन दोनों ने अपने सैनिकों को वापस बुलाया था लेकिन अब चीन इस क्षेत्र में भी बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है।

    पिछले साल से भारत-चीन में तनाव

    पिछले साल से भारत-चीन में तनाव

    भारत और चीन के बीच पिछले साल तनाव चरम पर पहुंच गया था जब चीनी सैनिक आक्रामक रूप से भारतीय क्षेत्रों में घुस आए थे जिसके बाद भारतीय जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया था। गलवान घाटी में दोनों पक्ष में हिंसक संघर्ष हुआ था जिसमें दोनों पक्षों के कई सैनिक मारे गए थे। भारत ने 20 जवानों के शहीद होने की बाद स्वीकार की थी जबकि चीन के 40 से अधिक जवान मारे गए थे। हालांकि चीन ने शुरुआत में सैनिकों की मौत से इनकार किया था लेकिन बाद में चीनी मीडिया में पीएलए के जवानों के मारे जाने की बात स्वीकार की गई थी लेकिन सैनिकों की संख्या को लेकर कोई स्पष्ट बात नहीं कही गई।

    संघर्ष के बाद दोनों पक्षों में भारी तनाव बना हुआ है और अभी तक कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है।

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