Chhattisgarh: कांकेर में 5 लाख की इनामी तेलुगू महिला कमांडर रुपी ढेर, बस्तर के जंगलों में चलता था सिक्का

Chhattisgarh Kanker Encounter: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग से सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। कांकेर जिले के छोटे बेठिया थाना क्षेत्र के जंगलों में सोमवार, 13 अप्रैल की सुबह हुई एक भीषण मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने कुख्यात तेलुगू महिला माओदी एरिया कमांडर रुपी को मार गिराया है।

रुपी पर शासन की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। कांकेर के पुलिस अधीक्षक (SP) निखिल रखेचा ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों और नक्सलियों के बीच आमना-सामना हुआ। मौके से नक्सली का शव और हथियार बरामद कर लिए गए हैं।

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सुरक्षा बलों के साथ कैसे हुई मुठभेड़?

पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि छोटे बेठिया थाना क्षेत्र के घने जंगलों में नक्सलियों का एक सक्रिय दस्ता किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए जमा हुआ है। इसके बाद डीआरजी (DRG) और सुरक्षाबलों की एक संयुक्त टीम को ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। जंगल में जैसे ही जवान एक विशेष पॉइंट पर पहुंचे, नक्सलियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।

जवानों ने भी फौरन मोर्चा संभाला और जवाबी हमला किया। काफी देर तक चली गोलीबारी थमने के बाद जब इलाके की तलाशी ली गई, तो वहां नक्सली कमांडर रुपी का शव मिला। पुलिस ने शव के साथ एक आधुनिक हथियार और भारी मात्रा में नक्सली सामग्री भी जब्त की है। बता दें कि इससे पहले रुपी का गार्ड कई जवानों के साथ सरेंडर कर दिया था।

Who Is Naxal Commander Rupi: कौन था एरिया कमांडर रुपी?

मारी गई नक्सली रुपी की दहशत उत्तर बस्तर इलाके में काफी समय से बनी हुई थी। वह नक्सली संगठन में एक महत्वपूर्ण ओहदे पर थी और कई सालों से सुरक्षाबलों की 'मोस्ट वांटेड' लिस्ट में शामिल थी। रुपी नक्सली संगठन के उत्तर बस्तर डिवीजन में एरिया कमांडर के पद पर सक्रिय थी। गौरतलब है कि, रुपी का पति भी नक्सल अभियान में मारा गया है।

उसकी खतरनाक गतिविधियों को देखते हुए सरकार ने उस पर 5 लाख रुपये का इनाम रखा था। रुपी कई बड़ी वारदातों की मास्टरमाइंड थी। उस पर पुलिस पार्टी पर घात लगाकर हमला करने, आईईडी (IED) ब्लास्ट कर जवानों को नुकसान पहुंचाने, सड़क निर्माण में लगी मशीनों को फूंकने और ग्रामीणों की हत्या जैसे कई संगीन मामले दर्ज थे। वह जंगलों के रास्तों की माहिर थी और स्थानीय स्तर पर नक्सलियों की भर्ती और रसद जुटाने का काम भी देखती था। उसकी मौत को नक्सली संगठन के लिए एक बड़ा 'सेटबैक' माना जा रहा है।

बदलती हवा मुठभेड़ और आत्मसमर्पण का दौर

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ दोतरफा कार्रवाई चल रही है। जहां एक तरफ बंदूक उठाने वालों को मुठभेड़ में ढेर किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार की आत्मसमर्पण नीति का असर भी दिखने लगा है। बता दें कि इसी महीने 2 अप्रैल को जेजेएमपी (JJMP) संगठन के सब-जोनल कमांडर सुरेंद्र लोहरा ने सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर हथियार डाल दिए थे। सुरेंद्र पर भी 5 लाख रुपये का इनाम था। लोहरा ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया था, जो नक्सलियों के टूटते मनोबल का प्रतीक है।

बस्तर में नक्सलियों पर 'फाइनल प्रहार'

पिछले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ के बस्तर, कांकेर और दंतेवाड़ा क्षेत्रों में सुरक्षाबलों ने अपने अभियान तेज कर दिए हैं। हाल ही में कई बड़े इनामी नक्सलियों को ढेर किया गया है या उन्होंने सरेंडर किया है।

SP निखिल रखेचा ने कहा कि इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि अन्य छिपे हुए नक्सलियों का पता लगाया जा सके। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं, उनके लिए आत्मसमर्पण की नीति खुली है, अन्यथा उनके खिलाफ इसी तरह की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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