Chhattisgarh Assembly election results 2018:रमन सिंह पर भारी पड़े ये 5 दांव, 15 साल में पहली बार बनेगी कांग्रेस की सरकार
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रायपुर। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश में जहां कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर है तो वहीं छत्तीसगढ़ में बीजेपी के हाथों से सत्ता छिन गई है। छत्तीसगढ़ में बीजेपी का सूपड़ा पूरी तरह से साफ हो गया है। 15 सालों में पहली बार यहां कांग्रेस को जीत मिली है। जनता ने रमन सिंह सरकार को पूरी तरह से नकार दिया है और कांग्रेस के हाथों में अहम जिम्मेदारी सौंपी हैं। छत्तीसगढ़ में 90 सीटों में से बीजेपी के हाथों में 21 सीटें मिलती दिख रही है, जबकि कांग्रेस 64 सीटों पर आगे चल रही है(अब तक के रुझाने के मुताबिक)। छत्तीसगढ़ में बीजेपी की इस बड़ी हार के पीछे कई वजहों को जिम्मेदार बताया जा रहा है। अब उन वजहों की चर्चा कर रहे हैं, जिसकी वजह से 15 साल से चली आ रही रमन सिंह सरकार को लोगों ने नकार दिया। उन पांच वजहों की चर्चा कर रहे हैं, जिसकी वजह से रमन सिंह छत्तीसगढ़ में फेल हो गए।

क्यों फेल हुए रमन सिंह,वजह नबंर: 01
छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार साल 2003 से लगातार सत्ता में है। 15 सालों से बीजेपी की सरकार को इस साल चुनाव में एंटी इन्केंबंसी का सामना करना पड़ा है। विधानसभा चुनाव में रमन सिंह के खिलाफ माहौल बनता दिख रहा था। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 रैलियां की तो वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ताबड़तोड़ 22 रैलियों की, लेकिन इसके बावजूद रमन सिंह का किला नहीं बच सका। 15 सालों से बीजेपी के सत्ता में रहने के बाद भी राज्य में हुए विकास से जनता असंतुष्ट थी। इसी का असर था कि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में बड़े प्रतिशत में वोटिंग हुई और कांग्रेस ने एक तरफा जीत हासिल हुई।

हार की दूसरी वजह: नाराज किसान
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को 'चावल वाले बाबा' के नाम से जाना जाता है, लेकिन राज्य की जनता अपने इस मुख्यमंत्री से नाराज थी। किसान लगातार फसलों के दाम को लेकर बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन करते आ रहे थे। किसानों का गुस्सा वोट के जरिए निकला। प्रदेश की जनता ज्यादातर गरीब और आदिवासी है। ऐसे में अनाज वितरण में घोटालों ने लोगों को रमन सिंह सरकार के खिलाफ नाराजगी भरने में बड़ी भूमिका निभाई। लोगों का सरकार से विश्वास कम हुआ। लाखों करोड़ों का पीडीएस घोटाला रमन सिंह के लिए अभिशाप साबित हुआ और 15 साल बाद जनता ने उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंका।

वजह नबंर-3: कार्यकर्ताओं की नारजगी
छत्तीसगढ़ में टिकट बंटबारे को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी। टिकट बंटवारे में कार्यकर्ताों की बात न सुने जाने और उन्हें महत्व न दिए जाने के चलते बीजेपी कार्यकर्ताओं में भारी रोष था। इस रोष ने पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचाया। वहीं पिछले 15 सालों से सत्ता में बैठे मुख्यमंत्री रमन सिंह ने राज्य में विकास के जितने वादे किए वो पूरे नहीं कर पाएं। कार्यकर्ताओं के साथ-साथ प्रदेस की जनता में भी सरकार के प्रति रोष दिखा। जिसका सामना उन्हें इस विधानसभा चुनाव में करना पड़ा है।

वजह नबंर-4: कांग्रेस का स्मार्टगेम प्लान
राज्य में किसान रमन सिंह की सरकार से नाराज थे। कांग्रेस ने इस नाराजगी को अपने पक्ष में करने के लिए जबरदस्त गेम खेला। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में किसानों के लिए कर्जमाफी का वादा किया, जो उसके लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। जनता ने बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस को तव्वजो दिया। जनता को उम्मीद जगी है कि कांग्रेस अपना वादा पूरा करेगी।

वजह नबंर -5 नक्सलवाद के मोर्चे पर रमन सिंह हुए फेल
छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ी समस्या नक्सलवाद की है। 15 सालों तक बीजेपी की सरकार नहीं, लेकिन सरकार नक्सलियों को रोकने में नाकाम रही। रमन सिंह सरकार नक्सलवाद पर नाकाम रही। प्रदेश में लगातार नक्सली हमले होते रहे। नक्सल प्रभावित इलाकों ने लोगों ने इस बार बढ़चढ़ कर वोटिंग में हिस्सा लिया, ताकि उन्हें भी बदलाव मिल सके। उनका भी विकास हो सके। नक्सली इलाकों की ये बंपर वोटिंग रमन सिंह की सरकार के खिलाफ रही। वहीं प्रदेश के आदिवासी समुदायों का भी भरोसा बीजेपी ने उठ गया। अब तक के रुझान से साफ हो गया कि बीजेपी सिर्फ शहरी इलाकों में ही अच्छा प्रदर्शन कर पाई है।












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