नामिबिया से भारत आ रहे 8 चीतों को क्यों रखा जाएगा भूखा, अधिकारी ने किया वजह का खुलासा
नामिबिया से भारत तक के सफर में इन चीतों को भूखा रखा जाएगा और खाने के लिए कुछ नहीं दिया जाएगा।
नई दिल्ली, 14 सिंतबर: अफ्रीकी देश नामिबिया से आने वाले आठ चीतों के लिए भोपाल के कूनो-पालपुर नेशनल पार्क में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। करीब 70 साल पहले विलुप्त हो चुके चीतों की गूंज एक बार फिर से देश में सुनाई देगी। लेकिन, इससे पहले ही भारत आने वाले इन चीतों को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। दरअसल नामिबिया से भारत तक के सफर में इन चीतों को भूखा रखा जाएगा और खाने के लिए कुछ नहीं दिया जाएगा। वन विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने इसके पीछे की वजह का भी खुलासा किया है।

ये है चीतों को भूखा रखने की वजह
एचटी की खबर के मुताबिक, मध्य प्रदेश वन विभाग के अधिकारी जेएस चौहान ने बताया, 'भारत आ रहे चीतों को उनके पूरे सफर के दौरान कुछ भी खाने के लिए नहीं दिया जाएगा। एक लंबी यात्रा के दौरान जानवरों को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। साथ ही जानवरों को सफर में मतली जैसी समस्या ना आए, इसके लिए भी ये जरूरी है।'

कार्गो प्लेन के जरिए जयपुर पहुंचेंगे चीते
जेएस चौहान ने आगे बताया, 'ये आठ चीते नामिबिया से पहले राजस्थान के जयपुर लाए जाएंगे और इसके बाद इन्हें मध्य प्रदेश के भोपाल में कूनो-पालपुर नेशनल पार्क ले जाया जाएगा। 17 सिंतबर को सुबह 7 बजे से 8 बजे के बीच ये चीते कार्गो प्लेन के जरिए जयपुर पहुंच जाएंगे। इसके बाद भोपाल के कूनो नेशनल पार्क तक का सफर हेलीकॉप्टर के जरिए किया जाएगा। एहतियात के तौर पर यह बहुत जरूरी है कि किसी लंबी यात्रा के दौरान एक जानवर को खाली पेट रखा जाए।'

पर्यावरण मंत्रालय की निगरानी में पूरी प्रक्रिया
आपको बता दें कि चीतों के आने की ये पूरी प्रक्रिया पर्यावरण मंत्रालय की निगरानी में पूरी हो रही है और मंत्रालय के अधिकारी लगातार नामीबिया के अधिकारियों के संपर्क में हैं। देश में करीब 70 साल पहले ही चीते विलुप्त हो चुके हैं और इन्हें फिर से बसाने के लिए नामिबिया से आठ चीते लाए जा रहे हैं। 17 सितंबर को अपने जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन चीतों को यहां क्वारंटाइन में छोड़ेंगे।

एक महीने के लिए छोटे बाड़ों में रखे जाएंगे ये चीते
जेएस चौहान ने बताया, 'कूनो नेशनल पार्क आने के बाद इन चीतों को एक महीने के लिए छोटे बाड़ों में रखा जाएगा और इसके बाद कुछ महीनों के लिए बड़े बाड़ों में शिफ्ट किया जाएगा। ऐसा करने से इन चीतों को खुद को आसपास के वातावरण के अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी। बाद में सभी चीतों को जंगल में छोड दिया जाएगा।'

प्रोटोकॉल का किया जाएगा पालन
इससे पहले वन विभाग के ही एक अधिकारी ने बताया था, 'एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में जानवरों को शिफ्ट करने के लिए नियम हैं कि उन्हें पहले क्वारंटाइन रखा जाए और इसके लिए हम लोगों ने 6 छोटे क्वारंटाइन बाड़े बनाए हैं। प्रोटोकॉल के मुताबिक, जानवरों को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में जाने से पहले और बाद में एक-एक महीने के लिए क्वारंटाइन किया जाना चाहिए।'

1947 में हुई थी देश में आखिरी चीते की मौत
गौरतलब है कि 1947 में भारत में आखिरी चीते की मौत के बाद 1952 में आधिकारिक तौर पर चीतों को देश में विलुप्त घोषित कर दिया गया था। इसके बाद 2009 में देश में अफ्रीकी चीता परिचय परियोजना बनाई गई। नामिबिया से आ रहे चीते भोपाल के कूनो नेशनल पार्क में पिछले साल नवंबर में शिफ्ट किए जाने थे, लेकिन कोरोना वायरस महामारी की वजह से इसमें देरी हो गई।












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