Chandrayaan 3 Mission : क्या है लैंडर 'विक्रम'का राज? कौन थे साराभाई जिनकी हुई थी रहस्यमय ढंग से मौत?
Lander 'Vikram' kya hai?: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान-3 लॉन्च करके सफलता का नया इतिहास रचा है।आपको बता दें कि इससे पहले केवल अमेरिका, रूस और चीन ही चंद्रमा पर सॉफ्ट लैडिंग कर पाए थे लेकिन इस बार इंडिया भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है।

फिलहाल पूरा भारत आज अपने वैज्ञानिकों पर गर्व कर रहा है। आपको बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन साल 2019 में गए चंद्रयान-2 मिशन का फॉलोअप है इसलिए इसमें भी लैंडर का नाम 'विक्रम' रखा गया है, जिसके पीछे एक बेहद खास वजह है।
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक
दअरसल वैज्ञानिक विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक के रूप में जाना जाता है इसलिए चंद्रयान-3 का ये मिशन उनको समर्पित किया गया है।
'डॉ. साराभाई को श्रद्धांजलि'
साल 2019 डॉ. विक्रम साराभाई की जयंती के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने भी कहा था कि 'जब 'विक्रम' लैंडर चंद्रमा पर उतरेगा तो यह सही मायनों में करोड़ों भारतीयों की ओर से डॉ. साराभाई को श्रद्धांजलि होगी।'
अहमदाबाद में हुआ था साराभाई का जन्म
आपको बता दैं कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों के जनक के रूप में लोकप्रिय विक्रम साराभाई ने ही इसरो की स्थापना की थी। 12 अगस्त 1919 के अहमदाबाद में जन्मे विक्रम साराभाई ने कैम्ब्रिज से पढ़ाई की थी और भारत लौटने के बाद वे सीवी रमन के साथ शोध के काम में जुट गए।
साराभाई ने लिखे 86 शोध पत्र
साइंस कि किताबों में खुद को झोंक देने वाले साराभाई ने अपनी लाईफ में 86 शोध पत्र लिखे और करीब 40 संस्थानों की स्थापना की । उनके अभूतकार्यों की वजह से ही उन्हें मरणोपरांत पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।
कॉस्मिक वैज्ञानिक कहलाते थे डॉ विक्रम
टाइम डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ कॉस्मिक रेज पर शोधपत्र लिखने वाले साराभाई को कॉस्मिक वैज्ञानिक कहा जाता है। उन्होंने रेडियो भौतिकी पर भी बहुत सारा काम किया है। वो परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष भी रहे थे।
तिरुवनंतपुरम में हुई थी रहस्यमय मौत
30 दिसंबर 1971 को तिरुवनंतपुरम के कोवलम रिसॉर्ट मे विक्रम साराभाई मृत पाए गए थे, बाद में पता चला कि उनकी मौत 'दिल का दौरा' पड़ने से हुई है।
साराभाई का नहीं हुआ था पोस्टमार्टम
हालांकि उनकी मौत ने कई प्रश्नों को खड़ा कर दिया था क्योंकि उनके जैसे महान वैज्ञानिक की अचानक हुई मृत्यु के बाद उनका पोस्टमार्टम तक नहीं हुआ था। लोगों को आज भी उनकी मौत रहस्यमयी ही लगती है।
मौत से एक घंटे पहले कलाम से की थी बात
उस वक्त जो लोग भी उनके साथ थे, उन्होंने यही कहा था कि 'साराभाई पूरी तरह से फिट थे, यहां तक कि अपनी मौत से एक घंटे पहले ही उन्होंने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम से बात की थी।'
'परिवारवालों को उनकी मौत नेचुरल लगी'
लेकिन उनकी मौत के सालों बाद उनकी बेटी मल्लिका साराभाई की लिखी किताब में कहा गया है कि 'परिवारवालों को उनकी मौत नेचुरल लगी थी और उन्हें उस पोस्टमार्टम कराने का कोई कारण नजर नहीं आया था।'












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