केंद्र ने संसद में बताया-कोरोना की दूसरी लहर में गंगा में फेंके गए शवों का नहीं है डेटा
नई दिल्ली, 07 फरवरी: केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि उसके पास महामारी की दूसरी लहर के दौरान गंगा नदी में फेंके गए कोरोना वायरस पीड़ितों के शवों की संख्या का कोई डेटा नहीं है। केंद्र सरकार की ओर ये यह जवाब उस सवाल पर दिया गया है जिसमे टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से गंगा में फेंके गए कोरोना महामारी से पीड़ित शवों की संख्या बताने के लिए कहा था।
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टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने यह भी पूछा कि इन्हें हटाने और कोविड -19 प्रोटोकॉल के अनुसार इनका निपटान करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं? केंद्र सरकार की ओर संख्या ना बताए जाने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार को जबरदस्त तरीके से घेरा है। इससे पहले जब केंद्र सरकार से संसद में यह पूछा गया था कि, कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से कितने लोगों की मौत हुई है? तो इस पर सरकार वह सख्या बताने में भी विफल रही थी।
पिछले साल अप्रैल-मई में कोविड की दूसरी लहर के दौरान कोरोना वायरस से पीड़ित संदिग्ध कई शव गंगा में तैरते हुए पाए गए थे। जिसे लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र और योगी सरकार की तीखी आलोचना की थी। इससे पहले राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने उत्तर प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा था कि जो हो रहा है वह अमानवीय और आपराधिक है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी कहा था कि यूपी सरकार को अपने लोगों को बुरी तरह से प्रभावित करने के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था, गंगा में तैरते पाए गए शव आंकड़े नहीं हैं, वे किसी के पिता, मां, भाई और बहन हैं। जो कुछ हुआ है वह आपको आपके दिल में हिला देता है।












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