हाईकोर्ट जजों की भर्ती: केंद्र ने कोलेजियम के भेजे 73 में से 43 नाम लौटाए
केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच चल रही खींचतान रुकती नहीं दिख रही है।
नई दिल्ली। हाईकोर्ट जजों की भर्ती को लेकर केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच चल रही खींचतान के अभी रुकने के आसार नहीं दिख रहे हैं। केंद्र ने कोलेजियम के भेजे 73 में से 43 जजों के नाम पर अपनी असहमति जताई है।

हाईकोर्ट में जजों की भर्ती के लिए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली कोलेजियम ने जजों के नाम वाली जो फाइल केंद्र को भेजी थी, उनमें से 34 पर ही सरकार ने मंजूरी दी है। बाकी 43 नाम वापस लौटा दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति के मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए ये बताया है। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि 77 सिफारिशों में से 34 जजों की नियुक्तियां कर दी गई हैं जबकि 43 सिफारिशों को दोबारा देखने के लिए कोलेजियम को भेजा गया है।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने केंद्र का पक्ष सुनने के बाद कहा कि 15 नवंबर को कोलेजियम की मीटिंग हो रही है जिसमें इस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख दी है।
पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी केंद्र को फटकार
आपको बतादें कि कोलेजियम ने फरवरी में हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए 77 नामों की लिस्ट भेजी थी, लेकिन केंद्र ने इस पर ध्यान नहीं दिया। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाराजगी जताई थी।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब जज ही नहीं हैं तो क्यों ना पूरे संस्थान को ताला लगा दें और लोगों को न्याय देना बंद कर दें।
चीफ जस्टिस ने कहा था कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को अपने अहम से ना जोड़े। उन्होंने कहा था कि हम नहीं चाहते कि दो संस्थान एक-दूसरे के आमने-सामने हों। चीफ जस्टिस ने कहा था कि हमें न्यायपालिका को बचाने की कोशिश होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने 9 महीनें तक जजों के नामों की सिफारिश वाली फाइल को दबाए रखने के लिए केंद्र की आलोचना की थी। कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि अगर भेजे गए नामों पर कोई आपत्ति है तो उन्हें वापस भेजा जाए। इसके बाद केंद्र ने अपना जवाब दिया है।












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