सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- कोरोना से कैसे जंग लड़ रहा है देश
नई दिल्ली। कोरोना वायरस संक्रमण मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने 52,094 वेंटिलेटरों की खरीद का आदेश जारी किया है और 30 अप्रैल तक 10,500 भारत पहुंच जाएंगे। 30 मई तक 30,000 और 30 जून तक अतिरिक्त 18,000 वेंटिलेटर आने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने राज्यों को 2,83,910 पीपीई किट और 20,52,417 एन 95 मास्क दिए हैं।

गृह मंत्रालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर दो स्टेटस रिपोर्ट्स के विश्लेषण से पता चलता है कि शेल्टर होम्स में प्रवासी मजदूरों/बेघरों की संख्या अप्रैल मध्य तक दोगुनी हो गई। जबकि खाने के लिए कतार में लगने वाले लोगों की संख्या 1.34 करोड़ है। गृह मंत्रालय की ओर से दायर ताजा स्टेटस रिपोर्ट 12 अप्रैल तक उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है, जबकि पहले की रिपोर्ट 31 मार्च के आंकड़ों के साथ दर्ज की गई थी।
राहत शिविरों पर निर्भर प्रवासी/दिहाड़ी मजदूरों की संख्या इन दो रिपोर्टों के बीच दो हफ्ते की अवधि में लगभग दोगुनी हो गई। 12 अप्रैल को 37,978 राहत शिविरों में लगभग 14.3 लाख लोग रह रहे थे. 1.34 करोड़ से अधिक लोगों को राहत शिविरों और खाद्य वितरण शिविरों के माध्यम से खाना दिया जा रहा है।
हेल्थकेयर और टेस्टिंग
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि Covid-19 की टेस्टिंग क्षमता भी 'खासी बढ़ी' है। सुप्रीम कोर्ट में दायर दो स्टेटस रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चलता है कि देश में 3 हफ्ते के लॉकडाउन के अंदर सभी जरूरत की चीजो के अनुमानों को संशोधित किया गया और सरकार की ओर से इन्हें बढ़ाया गया। सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में, 12 अप्रैल तक के डेटा के आधार पर गृह मंत्रालय ने दिखाया है कि जनवरी 2020 में टेस्टिंग के लिए सिर्फ एक लैब कार्यरत थी। वहीं 9 अप्रैल तक ऐसी लैब्स की संख्या बढ़कर 139 हो गई।
गृह मंत्रालय की ओर से 31 मार्च को दाखिल किए गए हलफनामे में दिखाई गई संख्या में भी उछाल है। 31 मार्च तक देश में 118 टेस्टिंग लैब्स उपलब्ध थीं। दिलचस्प है कि लैब्स की संख्या 31 मार्च से 9 अप्रैल के बीच बढ़ी। लेकिन, दोनों रिपोर्टों में हर दिन 'टेस्टिंग क्षमता ' 15.000 टेस्ट पर ही बनी रही।












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