केंद्र ने राजद्रोह कानून का किया बचाव, सुप्रीम कोर्ट में कहा- कानून सही, पुनर्विचार की जरूरत नहीं
नई दिल्ली, 07 मई: केंद्र सरकार ने राजद्रोह कानून का बचाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट से इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज की अपील की। अदालत में राजद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को जवाब देते हुए कहा कि कानून सही, इस पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि 5 जजों की संविधान पीठ के मामले में 1962 का फैसला बाध्यकारी है और एक अच्छा कानून बना हुआ है और इस पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है। केंद्र का कहना है कि 5-न्यायाधीशों की बेंच का फैसला समय की कसौटी पर खरा उतरा है और आधुनिक संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप आज तक लागू है। केंद्र ने कहा कि तीन जजों की बेंच IPC (देशद्रोह) की धारा 124A की संवैधानिकता की कानूनी चुनौती पर सुनवाई नहीं कर सकती है।
Sedition Law| Centre has told SC that 1962 verdict of 5-judge Constitution bench case is binding&continues to be a good law & needs no reconsideration. Centre says 5-judge bench judgement has stood the test of time & applied till date in tune with modern constitutional principles pic.twitter.com/3abVkpNB5K
— ANI (@ANI) May 7, 2022
एक लिखित प्रस्तुतीकरण में केंद्र ने मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अगुवाई वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ को बताया कि केदारनाथ सिंह बनाम बिहार राज्य में राजद्रोह कानून को बरकरार रखने का फैसला बाध्यकारी है। इसने यह भी कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ कानून की वैधता की जांच नहीं कर सकती है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, "एक संवैधानिक पीठ पहले ही समानता के अधिकार और जीवन के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों के संदर्भ में धारा 124 ए (राजद्रोह कानून) के सभी पहलुओं की जांच कर चुकी है।"
बता दें कि राजद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाएं एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा सहित पांच पक्षों द्वारा दायर की गई थीं। अदालत अब मंगलवार को मामले की सुनवाई करने वाली है।












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