Go First के दिवालियापन पर केंद्र का पहला रिएक्शन, सिंधिया बोले- Wadia Group का निर्णय 'दुर्भाग्यपूर्ण'
भारतीय विमानन सेवा कंपनी गो फर्स्ट ने एनसीएलटी में याचिका दायर कर दिवालिया होने तक अपनी उड़ाने रद्द करने की बात कही है। वहीं केंद्र सरकार ने कंपनी के इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

Center reaction on Go First bankruptcy: भारतीय एयरलाइंस कंपनी गो फर्स्ट के दिवालियापन को लेकर केंद्र सरकार की ओर से पहली प्रतिक्रिया आई है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि केंद्र सरकार गो फर्स्ट एयरलाइंस की हर संभव सहायता कर रही है। इसके के लिए कंपनी से जुड़े हितधारकों से भी बात की गई है। उड्डयन मंत्री ने कहा कि ऐसे में एयरलाइंस कंपनी का ताजा निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है।
लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रही भारतीय एयलाइंस कंपनी गो फर्स्ट ने नेशनल कंपनीज लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में दिवालियापन की धारा के तहत याचिका दायर की है। कंपनी की ओर से एनसीएलटी में आवेदन के बाद कहा कि वो तभी अपनी उड़ानें शुरू करेगी जब ट्रिब्यूनल उसे दिवालिया घोषित कर देगा।
गो फर्स्ट एयलाइंस के इस निर्णय को केंद्रीय उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने एक बयान में कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि परिचालन की समस्या से एयरलाइन की वित्तीय स्थिति खराब हुई है। यह हमारे संज्ञान में आया है कि एयरलाइन ने एनसीएलटी में आवेदन किया है।
मामले में न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार करना बुद्धिमानी है।" सिंधिया ने कहा कंपनी को इस समस्या से उबारने के लिए हितधारकों (Stakeholders) से बात की गई है। केंद्र गो फर्स्ट की हर संभव तरीके से सहायता कर रही है।
दरअसल, गो फर्स्ट का स्वामित्व वाडिया ग्रुप के पास है, जो कि कंपनी में 300 बिलियन डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है। वाडिया अब एयरलाइंस में और अधिक निवेश करने का इच्छुक नहीं है। जबकि एयरलाइंस को वित्तीय संकट से उबारने के लिए अधिक निवेश की आश्यकता है।
वहीं दूसरी ओर उड़ाने रद्द करने पर नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) ने एयरलाइंस को 'कारण बताओ' नोटिस भेजा है। नियामक ने कहा कि एयरलाइन उड़ाने रद्द करने का फैसला डीजीसीए को अवगत कराए बिना लिया और कंपनी फ्लाइट को कैंसिल करने की प्रक्रिया और उसके कारणों को लिखित रूप से बताने में विफल रही। डीजीसीए ने अपने बयान में कहा कि गो फर्स्ट को नोटिस का जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है। अगर एयरलाइंस निश्चित समयावधि में नोटिस का जवाब नहीं देती तो उसके खिलाफ मामले में एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले आज गो फर्स्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कौशिक खोना ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि उड़ानों को रद्द करना और दिवाला दाखिल करना एक 'दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय' था और यह 'कंपनी के हितों की रक्षा के लिए' किया जाना था। उन्होंने कहा, "प्रैट एंड व्हिटनी द्वारा इंजनों की आपूर्ति न करने के कारण वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिसने कंपनी को अपने बेड़े के आधे से अधिक 28 विमानों को जमीन पर उतारने के लिए मजबूर किया है।"












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