लड़कियां भी टी-शर्ट पहने परीक्षा देते हुए, मुसलमान नाराज
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) अब मुस्लिम उलेमा सेंट्रल बोर्ड आफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) से नाराज है। वे उससे लड़ने के लिए तैयार हैं। नाराज वे इसलिए है क्योंकि इनका मानना है कि सीबीएसई के ड्रेस कोड से मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं आहत होती है।
इन उलेमाओं का मानना है कि परीक्षा में इलेक्ट्रानिक सामान को लेकर जाने पर सीबीएसई को परेशानी नहीं है। हां,सीबीएसई को सिर पर स्कार्फ बांधने और पूरी बाजू का कुर्ता पहनने से परेशान है।
पूरी बाजू का कुर्ता
जमात उल हिन्द के महासचिव मोहम्मद सलीम इंजीनियर कहते हैं कि स्कार्फ और पूरी बाजू का कुर्ता पहनना इस्लाम की शिक्षाओं के अंतर्गत है। इस तरह की आजादी देश का संविधान भी देता है। इसलिए उक्त ड्रेस कोड स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हम सीबीएसई से उक्त ड्रेस कोड को फौरन वापस लेने की मांग करते हैं।
ट्राउसर ही पहने
दरअसल सीबीएसई ने अपने एक हालिया फैसले में कहा है कि आल इंडिया प्री मेडिकल परीक्षा में भाग लेनी वाली छात्राएं सिर्फ ट्राउसर, आधी बाहों का कुर्ता या टी- शर्ट ही पहन सकती है। जमात को इसी ड्रेस कोड़ से नाराजगी है।
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सीबीएसई ने उक्त परीक्षा के लिए धार्मिक चिन्ह वाली मालाएं या अंगुठियों के पहनने पर भी रोक लगाई है। अब मुस्लिम उलेमा सेंट्रल बोर्ड आफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) से नाराज है।
आल इंडिया प्री मेडिकल परीक्षा 25 जुलाई को होगी। वरिष्ठ पत्रकार नदीम अक्तर ने भी सीबीएसई के ड्रेस कोड़ की खिंचाई करते हुए कहा कि उसे छात्र-छात्राओं की ड्रेस कोड़ से क्या लेना देना। उसे परीक्षा को बेहतर तरीके से आयोजित करनी चाहिए। उसे ड्रेस कोड़ जैसे मसलों को डिस्कस नहीं करना चाहिए।













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