नमामि गंगे परियोजना के 2600 करोड़ का इस्तेमाल ही नहीं हुआ: कैग रिपोर्ट
नई दिल्ली। गंगा नदी के कायाकल्प के लिए शुरू की गई नरेंद्र मोदी सरकार की गई नमामि गंगे परियोजना के लिए आवंटित किए गए 2600 करोड़ से ज्यादा का सरकार उपयोग ही नहीं कर सकी है। संसद में नमामि गंगे योजना पर मंगलवार को कैग की रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई है। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2014-15 से 2016-17 के बीच नमामि गंगे के लिए आवंटित कुल राशि का 8 से 63 फीसदी हिस्सा ही खर्च किया गया, ऐसे में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के क्रमश 2133.76 करोड, 422.23 और 59.28 करोड़ रूपए खर्च नहीं हुए। विभिन्न राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूह और एग्जीक्यूटिंग एजेंसियों के उपक्रमों के साथ 31 मार्च 2017 तक ये रकम खर्च की जानी थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 46 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स, इंटरसेप्शन एंड डायवर्सन प्रोजेक्ट्स और नहर परियोजनाओं की लागत 5,111.36 करोड़ रुपए थी। 2,710 करोड़ रुपए की लागत वाली 26 परियोजनाओं में देरी की गई। इसकी वजह भूमि नहीं होना और ठेकेदारों का धीमी गति से काम करना रहा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कार्य योजना को अंतिम रूप नहीं दिए जाने की वजह से स्वच्छ गंगा निधि में से एक भी रुपए का इस्तेमाल नहीं किया जा सका है और इसके तहत कुल 198.14 करोड़ रुपए अभी भी बैंकों में पड़े हैं।
कैग ने कई सुझाव भी दिए हैं। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को नदी संरक्षण क्षेत्रों की पहचान कर उनकी प्राथमिकता तय करनी चाहिए ताकि गंगा के तटीय क्षेत्रों में निर्माण और अतिक्रमण की गतिविधियों को रोका जा सके।












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