सरकार कैसे बंद करती है इंटरनेट? आपात स्थिति में क्या होती है प्रक्रिया
नई दिल्ली। संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। लखनऊ और संभल में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद ऐहतियात के तौर पर इंटरनेट बंद करने का फैसला किया गया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी तरह की अफवाह पर ध्यान ना दें, प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, वाराणसी आदि जिलों में इंटरनेट बंद है जबकि गुरुवार को दिल्ली के कुछ इलाकों में भी इंटरनेट बंद था। क्या आप जानते हैं कि इंटरनेट सस्पेंड करने की प्रक्रिया क्या होती है।

इंटरनेट बंद करना एक पूरी प्रकिया है
इंटरनेट बंद करने की एक पूरी प्रक्रिया होती है। इसके लिए राज्य के गृह सचिव आदेश देते हैं जिसके तहत सर्विस प्रोवाइडर को इंटरनेट सर्विस बंद करने के लिए कहा जाता है। ऑर्डर को अगले कामकाजी दिन के भीतर केंद्र या राज्य के रिव्यू पैनल के पास भेजना होता है। इसके बाद 5 दिनों के भीतर इसकी समीक्षा की जाती है। केंद्र सरकार के रिव्यू पैनल में कैबिन सेक्रटरी, लॉ सेक्रेटरी और टेलीकॉम सेक्रेटरी होते हैं।

आपात स्थिति में कौन दे सकता है आदेश?
वहीं, आपात स्थिति में केंद्र या राज्य के गृह सचिव द्वारा अधिकृत जॉइंट सेक्रेटरी इंटरनेट बैन करने के लिए आदेश दे सकते हैं। इसके लिए 24 घंटें के भीतर मंजूरी लेनी होती है। बता दें कि 2017 के पहले तक जिले के जिलाधिकारी इंटरनेट बंद करने का आदेश देते थे। लेकिन इसके बाद सरकार ने इंडियन टेलिग्राफ एक्ट 1885 के तहत टेम्पररी सस्पेंशन ऑफ टेलीकॉम सर्विसेज रूल्स तैयार किए, जिसके बाद से अब केंद्र या राज्य के गृह सचिव या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी इंटरनेट बंद करने का आदेश दे सकते हैं।

यूपी के कई जिलों में इंटरनेट बंद
संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहे हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए यूपी सरकार ने गाजियाबाद, प्रयागराज और लखनऊ के कुछ इलाकों में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद करने का फैसला लिया है। प्रयागराज में इंटरनेट सेवा शुक्रवार सुबह दस बजे तक सस्पेंड रहेगी। इसके अलावा मेरठ, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, सहारनपुर, शामली, अलीगढ़ जिलों में इंटरनेट सेवाएं शुक्रवार आधी रात तक के लिए बंद कर दी गई हैं।












Click it and Unblock the Notifications