हिटलर और मुसोलिनी भी लोकतंत्र से ही उभरे थे: राम माधव
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के महासचिव राम माधव ने कहा है कि हिटलर और मुसोलिनी जैसे नेता भी लोकतंत्र की ही उपज थे। दिल्ली में रायसीना डायलॉग-2020 के दौरान माधव ने भारत में लोकतंत्र की स्थिति और दुनियाभर में लोकतांत्रिक देशों को लेकर एक बातचीत में ये कहा। राम माधव ने कहा कि हिटलर और मुसोलिनी के बाद से दुनिया में उदारवादी लोकतंत्र हुए हैं। समय के साथ-साथ लोकतंत्र मजबूत भी होता चलता है।

भारत में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर राम माधव ने कहा, भारत में लोकतंत्र की प्रगति पर भी सवाल होता है। इस तरह से सवाल उठाया जाना साबित करता है कि भारतीय लोकतंत्र जीवंत बना हुआ है। इसका अपना एक रूप है जो खुद अपना रास्ता बनाते हुए चलता है। उन्होंने कहा, कमियों के बावजूद हम एक मजबूत लोकतांत्रिक देश हैं। हमारा झुकाव हमेशा लोकतंत्र की तरफ रहेगा। पूरी दुनिया में कहीं भी लोकतंत्र का एक सर्वमान्य मॉडल नहीं है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ही कई तरह के लोकतांत्रिक मॉडल हैं। भारत ने पड़ोसी देशों को भी लोकतंत्र बहाल करने में मदद की है।
नागरिकता कानून की मुखालफत को लेकर हुए सवाल पर राम माधव ने कहा कि इस मामले में हम कह सकते हैं लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं है, ना ही इसे पढ़ा है। यह कानून 1955 के नागरिकता कानून में संशोधन कर बनाया गया है। कानून बनाने और उसमें संशोधन करने में फर्क होता है। सरकार लगातार इसको लेकर समझा रही है।
रायसीना डायलॉग में 12 देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इसमें 100 देशों के करीब 700 विशेषज्ञों की इसमी भागीदारी रही है। रायसीना डायलॉग में इस बार वैश्वीकरण, साल 2030 का एजेंडा, तकनीकी का महत्व, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद पर चर्चा हुई।












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