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ज्योतिरादित्य सिंधिया को जल्‍द ही सौंपी जाएगी ये बड़ी जिम्मेदारी!

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बेंगलुरू। मध्‍यप्रदेश में कमलनाथ को मुख्यमंत्री बने एक साल पूरा हो चुका है। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया तेवर बेहद तल्ख रहे हैं। सार्वजनिक मंचों से उन्होंने नाथ सरकार के कामकाज की मजम्मत करने में कोई गुरेज नहीं किया लेकिन पिछले एक माह से सिंधिया के तेवर नर्म दिखे हैं। महीने भर के दरमियान उन्होंने पहले जैसा सरकार के कामकाज की आलोचना वाला कोई बयान भी नहीं दिया है। मध्‍यप्रदेश की कमलनाथ सरकार के कामकाज को लेकर बराबर सवाल खड़े करने वाले सिंधिंया के तेवर बदलने की प्रमुख वजह बहुत ही अहम हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान उन्‍हें शीर्घ ही बड़ी जिम्मेदारी सौंपने जा रहा हैं।

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बता दें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के विश्वस्त सहयोगी ज्योतिरादित्य सिंधिया काफी करीबी हैं। लेकिन सिंधिया मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही नाराज चल रहे थे।15 साल के वनवास के बाद 2018 में कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की सत्ता में वापसी की थी। इस वापसी में ज्योतिरादित्य सिंधिया का रोल बेहद अहम रहा था। सिंधिया मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल थे लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के हस्तक्षेप से कुर्सी मिली थी कमलनाथ को। मुख्यमंत्री न बन पाने का मलाल सिंधिया के चेहरे पर पहले ही दिन से दिखाई दिया था।

सिंधिया ने इसलिए बनायी थी पार्टी से दूरी

सिंधिया ने इसलिए बनायी थी पार्टी से दूरी

मध्‍यप्रदेश में कांग्रेस ने सिंधिया को सामने रखकर विधानसभा चुनाव लड़ा था। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को बनाया गया। चुनाव में जैसे ही कांग्रेस को बहुमत मिला। कांग्रेस आलाकमान ने उम्रदराज कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनवा दिया। जिसके बाद सिंधिया प्रदेश की राजनीति से दूर हो गए थे। इतना ही नहीं कुछ समय पूर्व सिंधिया के भाजपा में शामिल होने की भी खूब चर्चा हुई। पिछले एक वर्ष में सिंधिया ने अपने कई मसलों पर उन्होंने पार्टी लाइन से इतर अपनी बात तो कही ही है साथ में वह मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के कामकाज को लेकर भी बराबर सवाल खड़े किए। हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ट्वीटर प्रोफाइल के बॉयो से कांग्रेस का नाम हटाकर भी उन अटकलों को हवा दी। सिंधिया ने अपने ट्वीटर बॉयो से पूर्व सांसद और संसद सदस्य हटाकर समाजसेवी लिख दिया था।

नाराज सिंधिया को खुश करने की तैयारी

नाराज सिंधिया को खुश करने की तैयारी

मालूम हो कि ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्यप्रदेश के नेता हैं। वह ग्वालियर चंबल संभाग में मजबूत पकड़ रखते हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी के महासचिव थे लेकिन राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने अपना पद भी छोड़ दिया था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद एक फिर कांग्रेस की कमान संभाल रही सोनिया गांधी सिरे से युवा नेतृत्व को किनारे कर रखा था। लेकिन कांग्रेस सुप्रीमो अपनी ये गल्ती सुधारना चाहती हैं। पिछले दिनों मध्यप्रदेश सरकार और पार्टी के कामकाज की दिशा से थोड़ा खिन्न चल रहे सिंधिया की नाराजगी दूर हो जाएगी।

सिंधिया खेंमे को खुश करने की कवायद

सिंधिया खेंमे को खुश करने की कवायद

गौरतलब है कि सिंधिया को मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने की मांग उनके समर्थक मंत्री समय-समय पर करते आ रहे हैं। सिंधिया के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनने की अटकलें अगस्त-सिंतबर में भी लगी थीं। वे कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले। इस बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सोनिया से मुलाकात की। इसके बाद सिंधिया को अध्यक्ष बनाने का फैसला फिर टाल दिया गया। लेकिन कांग्रेस ने बीच का रास्‍ता निकालते हुए कुछ ऐसा निर्णय लिया है जिससे सिधिंया का खेंमा भी खुश हो जाएगा साथ ही मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार सुचारू रूप से चल सकेगी

राज्यसभा भेजे जाएंगे सिंधिया

राज्यसभा भेजे जाएंगे सिंधिया

कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमें को खुश और संतुष्‍ट करने का एक नया रास्ता कांग्रेस ने खोज लिया है। वो सिंधिया को मध्य प्रदेश कोटे से राज्यसभा में भेजने की तैयारी में है। इस एक रास्ते से कई समस्याओं का हल निकल आएगा। सिंधिया को सम्मान के साथ संसद और देश की राजनीति में शिफ्ट कर दिया जाएगा। साथ ही मध्य प्रदेश में उनके समर्थकों को खुश और शांत कर कमलनाथ की सरकार आसानी से चलायी जा सकेगी। इस सारे गणित और समीकरण को देखते हुए सिंधिया को राज्यसभा सदस्य बनाया जा रहा है।

अप्रैल में मध्‍यप्रदेश की तीन सीटें खाली हो रही है

गौरतलब है कि अप्रैल 2020 को मध्यप्रदेश की तीन राज्यसभा की सीटें खाली हो रही हैं। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण जटिया का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इन तीन सीट में से दो कांग्रेस को मिलना तय माना जा रहा है। इन्हीं में से एक सीट पर कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा भेजा जाएगा।

इसलिए नहीं सौंपा जाएगा एमपी का कांग्रेस अध्‍यक्ष पद

इसलिए नहीं सौंपा जाएगा एमपी का कांग्रेस अध्‍यक्ष पद

कांग्रेस आलाकमान के पास ज्योतिरादित्य सिंधिया को एमपी में सेट करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष का पद है। लेकिन मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी जाती है तो राज्य में दो पावर सेंटर हो जाएंगे। ऐसे में आए दिन की खटपट से बचने के लिए कांग्रेस चाहती है कि सिंधिया को राज्यसभा में भेज कर उन्हें फिर से केन्द्र की राजनीति में शिफ्ट कर दिया जाए। इससे मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार आराम से चल सके और अपना पांच साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा कर सके।

तीन दर्जन विधायक सिंधिया के ख़ेमे में

तीन दर्जन विधायक सिंधिया के ख़ेमे में

बता दें पिछले महीने भर में दिलचस्प कोण यह बना है कि कमलनाथ और सिधिंया कई अवसरों पर साथ नज़र आये। पार्टी से जुड़े कुछ कार्यक्रमों में शिरक़त करने के लिए दोनों नेताओं ने एक ही जहाज से यात्राएं भी कीं। कमलनाथ द्वारा सिंधिया को ‘तवज्जो' दिये जाने से दोनों ही ख़ेमों ने राहत की सांस ली है। यहां बता दें कि कांग्रेस के कुल 114 विधायकों में से तीन दर्जन के आसपास विधायक सिंधिया ख़ेमे से हैं।

बैठक में सिंधिया को सम्मानजनक पद देने पर हुई वार्ता

बैठक में सिंधिया को सम्मानजनक पद देने पर हुई वार्ता

पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया भी थे। सोनिया गांधी कुछ समय से मध्यप्रदेश की राजनीतिक घटनाओं पर नजर रख रही थी। अंतत: कांग्रेस अध्यक्ष ने ज्योतिरादित्य की पार्टी में आवश्कता को महत्वपूर्ण मानते हुए उन्हें सम्मानजनक स्थान देने का मन बनाया है।

कांग्रेस की सफलताओ में सिंधिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा

पार्टी के एक वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि ज्योतिरादित्य केवल ग्वालियर राजघराने के सदस्य ही नहीं हैं, बल्कि कांग्रेस पार्टी के अच्छे युवा नेताओं में हैं। ज्योतिरादित्य को राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में कमलनाथ के साथ कांग्रेस को सत्ता में लाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। 2018 में कांग्रेस पार्टी को मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सफलता भी मिली। इस दौरान सिंधिया राज्य के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे, लेकिन शीर्ष नेतृत्व के कहने पर उन्होंने राहुल गांधी के साथ केन्द्रीय राजनीति करना ही जरूरी समझा। इसके प्रतिफल में कांग्रेस पार्टी ने ज्योतिरादित्य को प्रियंका गांधी के साथ महासचिव और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभार भी सौंपा था।

 सिंधिया के सितारे गर्दिश में चह रहे थे

सिंधिया के सितारे गर्दिश में चह रहे थे

बता दें मध्यप्रदेश की अपनी पारंपरिक गुना शिवपुरी लोकसभा सीट हारने के बाद से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के सितारे गर्दिश में चल रहे थे। मध्‍यप्रदेश में उनके पास पार्टी की कोई विशेष जिम्मेदारी नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी के लिए वो लगातार संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि चुनाव हारने के बाद सिंधिया को पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था और अभी हाल ही में ही उन्होंने झारखंड में कांग्रेस का चुनाव प्रचार किया था।

कांग्रेस के स्‍टार प्रचारक सिंधिया

सिंधिया का नाम कांग्रेस की स्टार प्रचारकों की सूची में था। झारखंड चुनाव के बाद इंदौर पहुंचे सिंधिया ने कहा था कि इस बार झारखंड में कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनेगी और हुआ भी वही। झारखंड में कांग्रेस गठबंधन को बहुमत मिल गया है। इसमें सिंधिया की मेहनत भी शामिल है। इसीलिए अब कांग्रेस आलामान ने उन्‍हें अब यह जिम्मेदारी देकर उनकी नाराजगी दूर करना चाहता है।

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English summary
By Congress Jyotiraditya Scindia will Soon Be Given This Big Responsibility
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