Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

बुंदेलखंड के जख्म बन गये नासूर, नहीं मिला इलाज

04 फरवरी 2012 को चित्रकूट की खोह पुलिस लाइंस में आयोजित सपा की एक रैली में मुलायम सिंह यादव ने कहा कि प्रदेश में सपा सरकार बनने पर बुंदेलखंड का खास ध्यान दिया जाएगा। इज्राएल की तर्ज पर चित्रकूट का विकास होगा। इस बात के साथ बुंदेलखंड के हर व्यक्ति ने विकास की आस बांध ली।

मन ही मन बुदबुदाने लगा कि अब और फांसी के फंदे शायद नहीं तैयार होंगे। फलस्वरूप लोगों ने विधानसभा चुनावों में विश्वास के साथ सपा को 5 सीटों पर विजय दिलाई। हालांकि बसपा के मुकाबले सपा को दो सीटें कम मिलीं। जबकि भाजपा को तीन और कांग्रेस को चार सीटें मिलीं।

पढ़ें- बुंदेलखंड बन सकता है अलग राज्य

विधानसभा चुनावों में अखिलेश के चेहरे के साथ सपा ने सूबे की सत्ता हासिल की। लेकिन इस बार भी लोगों को हाथ लगी निराशा। न तो चित्रकूट इज्राएल बन पाया और बुंदेलखंड का कथित विकास शवों की राख के साथ सारी कहानी बयां कर रहा है। लोगों ने बातचीत के दौरान बताया कि चुनाव होता है तो वादों की बयार चलती है, जिन्हें देखकर हम संतोष कर लेते हैं। लेकिन सत्ता की चमक ओढ़ते ही न जाने क्यों सारे के सारे वादे कहीं गुम हो जाते हैं।

तस्वीरों में नेता जो आये और चले गये

-
बुंदेलखंड की राजनीति

बुंदेलखंड की राजनीति

-
-

फिर वो मायावती की सरकार हो या फिर मुलायम की, भाजपा और कांग्रेस भी इनसे कुछ अलग नहीं। इसके इतर लोगों का यह भी कहना है कि सियासत ने इन्हें हर बार ठगा है, विकास के नाम पर पैकेज पर पैकेज जारी हुए लेकिन उन पैकेज का पैकेट बनाकर न जाने किन किन पतों पर भेज दिया गया। इस पूरे मामले पर हमने पड़ताल की। पेश है ये रिपोर्ट :

हर बार ठगा गया 'बुंदेलखंड'

इसी वर्ष की 14 जनवरी को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने पंडुई में अपनी रात गुजारी। जिले में सुविधाओं की खातिर जिम्मेवार हर एक महकमे का हर कर्मचारी पंडुई को चमकाने में जुट गया। पर वो महज एक दिन की चमक थी। दरअसल छिपाने की कोशिश की जा रही थी कि तमाम दावों की कहीं कलई न खुल जाए।

पढ़ें- प्यासा बुंदेलखंड

इस गांव से करीबन 80 किलोमीटर की दूरी पर हमीरपुर के मौदहा ब्लॉक का गुसियारी गांव में करीबन 70 हैंडपंप गिनती की खातिर तो हैं लेकिन इनमें से करीबन 95 फीसदी नमूना बनकर खड़े हैं। बांदा शहर के इर्द गिर्द के गांवों में ही नजर डाली जाए तो स्थिति काफी दयनीय नजर आती है। वादों की हकीकत नंगी आँखों में बेबसी के आंसू ला देती है। बांदा शहर के ही कई बड़े तालाब व्यवस्थाओं की ढ़ीला हवाली की वजह से प्रदूषण की मार झेल रहे हैं।

2010 की यूपीए और बुंदेलखंड की खातिर 7000 करोड़ के पैकेज की हकीकत

मूर्तियों में दफना दी गई जिंदगी!

सूखे की मार झेलकर त्रस्त हो चुके बुंदेलखंड को साल 2010 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने 7000 करोड़ का पैकेज जारी किया। इस पैकेज के जरिए सूखे और जल संकट से निबटने के लिए कई काम कराए जाने थे। लेकिन इस रकम का इस्तेमाल किस तरह से हुआ..ये जानकर आप दंग रह जाएंगे।

पढ़ें- बुंदेलखंड में कबाड़ बीन कर बच्चों ने मनाया गणतंत्र दिवस

बुंदेलखंड के लोगों के मुताबिक बुंदेलखंड विशेष पैकेज से बांदा में चौधरी चरण सिंह रसिन बांध परियोजना बनी थी, जिसमें करीबन 850 किसानों की कृषि जमीन डूब क्षेत्र की ली गई थी। लेकिन इसमें मछली पालन किया जाता है। जबकि सिंचाई के लिए पानी मुहैया न हो पाने की वजह से किसान संकट की स्थिति में हैं। स्थानीय लोगों ने ये भी बताया कि बसपा सरकार ने बाँध के दोनों ओर इको पार्क बनवा दिए। जिसमें सुंदरता के लिए गौतमबुद्ध की मूर्ति लगवाई गई, सिल्ट से बने हिरन आदि बनवाए गए। लेकिन वे भी बद्हाल हालत में हैं।

यहां तक प्लास्टर ऑफ पेरिस से तैयार कराए गए खंभे हवा के पहले झोंके के साथ ही उखड़ गए। उन खंभों में बालू भरी हुई थी। बद्तर अवस्था को देखकर काम की गुणवत्ता का सीधा अंदाजा लगाया जा सकता है।

पहली बारिश में बह गए 'डैम'

वन विभाग ने बांदा ज़िले में कोल्हुआ जंगल में 58 लाख के ड्राई चेक डैम बनाए थे, वे पहली बारिश भी नहीं झेल पाए और बह गए।

'500 करोड़' किस कुएं की गहराई में

पैकेज में बीस हज़ार नए कुएं बनाने और पुराने कुओं की मरम्मत करने के लिए पांच सौ करोड़ रुपए की सीमा तय की गई थी। लेकिन हाल ये है कि बुंदेलखंड में नया कुआं बमुश्किल ही देख पाना संभव है। जबकि पुराने कुओं की हालत देखकर लगता नहीं कि इनके रखरखाव पर सैकड़ों करोड़ रुपए बहा दिए गए। सवाल उठता है कि पांच सौ करोड़ की रकम आखिर किस कुएं की गहराई में दफना दिए गए।

क्या खा-पीकर हजम कर दी गईं बकरियां?

पशुपालन विभाग का हाल भी बद्हाल रहा। जानकारी के मुताबिक बकरियां ख़रीदने के लिए स्वयं सहायता समूहों को सौ करोड़ रुपए जारी किए गए थे। पर ख़रीददारी केवल कागजों पर ही हुई लगती है। लोगों का कहना है कि नोटों की बकरियां खा-पीकर हजम भी कर दी गई हैं।

बुंदेलखंड की इस तस्वीर को देख आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह से यहां के लोगों को ठगा जाता रहा है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+