विदेश से भारतीयों का शव लाना अब नहीं होगा पीड़ादायक, सरकार ने एयर इंडिया से किया करार
नई दिल्ली। विदेश में जब किसी रिश्तेदार या परिवार के सदस्य की मृत्यु होती है तो उसके शव को वापस भारत लाना परिवार के लिए काफी बड़ी चुनौती बन जाता है। ना सिर्फ चुनौती बल्कि यह काफी महंगा भी होता है। मृत्यु की संवेदना के बीच इस तरह की मुश्किल से निपटना आसान नहीं होता है। लेकिन अब केंद्र सरकार ने इस मुश्किल से निजात दिलाने के लिए एयर इंडिया से करार दिया है।

काफी दिक्कत होती थी
दरअसल हाल ही में जिस तरह से मिडिल ईस्ट से मृत भारतीय नागरिकों को स्वदेश लाने में काफी दिक्कत सामना करना पड़ा था, जिसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।एक आधिकारिक आंकड़े के अनुसार हर दिन तकरीबन 10 भारतीय की विदेश में मृत्यु होती है, जिसमे से अधिकतर सड़क हादसे की वजह से या फिर प्राकृति मृत्यु होती है।
बैठक के बाद हुआ फैसला
भारतीय समुदाय के नेता पिछले कई वर्षों से इस मुद्दे को उठा रहे थे, जिसके बाद विदेश मंत्रालय, उड्डयन मंत्रालय, एयर इंडिया से कई बार इस मसले को लेकर बैठक हुई। जिसपर आखिरकार आम सहमति बनी और इसका समाधान सामने आया है। सरकार ने एयर इंडिया से विदेश में मृत भारतीय नागरिकों को वापस स्वदेश लाने के लिए परिवार से इसका किराया फ्लैट रेट पर लेने के लिए कहा गया है।
कितना होता था खर्च
इस करार से पहले तमाम देशों से शव को वापस भारत लाने का अलग-अलग खर्च होता था। यूएई से 33 लाख, सऊदी अरब से 27 लाख, कुवैत से 9 लाख, ओमान से 8 लाख, कतर से 6.5 लाख, बहरीन से 3.5 लाख रुपए खर्च होता था। लेकिन सरकार द्वारा एयर इंडिया से करार के बाद अब इन दामों में 40 फीसदी की कमी आएगी और 12 साल से कम उम्र के बच्चों के शव लाने में किराया फ्लैट रेट का आधा होगा। हाल ही में वाराणसी में हुए प्रवासी भारतीयों के कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा था कि विदेश से भारतीयों के शव को वापस लाना सरकार की प्राथमिकता है।
486 शवों को लाया गया भारत
सरकार के अधिकारी ने कहा कि हम इसे सस्ता, बिना किसी दिक्कत की प्रक्रिया बनाना चाहते हैं। 2016 से 2018 के बीच सरकार ने 486 शवों को भारत लाने के लिए अबतक कुल 1.6 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। अधिकारी ने बताया कि एयरलाइंस सवजन के अनुसार किराया वसूलती है, ऐसे में हर शव का किराया तकरीबन 50000 से एक लाख रुपए होता है। एयरलाइंस इस वजह से भी अधिक किराया वसूलती हैं क्योंकि कॉफिन को अन्य यात्रियों के सामान के साथ नहीं रखा जा सकता है, लिहाजा यह अधिक जगह लेता है।












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