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मुंबई: कोर्ट में झूठी साबित हुई पत्नी की दलील, पति को देगी 50 हजार मुआवजा

By VikashRaj Tiwari
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    नई दिल्ली। आमतौर पर तलाक के मामले में पति पत्नी को मुआवजा देता है लेकिन ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसके मुताबिक मुआवजे के तौर पर 50 हजार पत्नी को देने होंगे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पत्नी से प्रताड़ित दक्षिण मुंबई के एक बिजनसमैन के पक्ष में तलाक का फैसला सुनाया और पत्नी को भरपाई के रूर में 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। दरअसल पीड़ित शख्स की पत्नी ने अपने पति के खिलाफ दहेज और आपराधिक मामला दर्ज कराया था। इसके बाद बिजनसमैन को गिरफ्तारी से लेकर कई और मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

    पत्नी ने दर्ज कराया था झूठा मुकदमा

    पत्नी ने दर्ज कराया था झूठा मुकदमा

    दरअसल मुबंई के रहने वाले एक शख्स ने अपनी पत्नी पर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी ने उसके और उसके परिवार के खिलाफ कई झूठे मुकदमे दर्ज कराए हैं। पति का आरोप था कि पत्नी ने उस पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का झूठा आरोप लगाया है। इतना ही नहीं उसने कैंसर पीड़ित अपनी सास के खिलाफ भी प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। ये बात भी सामने आई की महिला अपनी सांस को पीटती थी। महिला द्वारा लगाए गए आरोपों में अपने देवर के खिलाफ छेड़छाड़ का आरोप भी शामिल था। उसने अपनी शिकायत में कहा था कि पति के चिकित्सा अभ्यर्थी भाई ने उससे छेड़छाड़ के लिए गुंडे भिजवाए थे।

    क्रूरता के आधार पर पीड़ित पति को तलाक का हकदार बताया

    क्रूरता के आधार पर पीड़ित पति को तलाक का हकदार बताया

    जस्टिस कमलकिशोर और जस्टिस बुर्गेस कोलाबावाला ने इसे हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत क्रूरता के आधार पर पीड़ित पति को तलाक का हकदार बताया। पीड़ित ने अदालत में कहा कि 10 साल की शादी के दौरान पत्नी ने उसे और परिवार को प्रताड़ित किया। इससे उसे स्वयं और परिवार के सम्मान को ठेस पहुंची है।

    फैमिली कोर्ट ने पति के खिलाफ फैसला सुनाया था

    फैमिली कोर्ट ने पति के खिलाफ फैसला सुनाया था

    इससे पहले इस मामले में फैमिली कोर्ट ने पति के खिलाफ फैसला सुनाते हुए तलाक की अर्जी को ना मंजूर कर दिया था। इस के साथ कोर्ट ने पति को 15 हजार रुपए बतौर मुआवजा पत्नी को देने के लिए कहा था। कोर्ट के इस फैसले को खारिज करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने इस मामले में बिल्कुल गलत तरह से फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा की फैमिली कोर्ट की गलती यह थी कि उसने ये केस अलग-अलग तरीके से देखा जबकि इसको एक साथ जोड़कर देखने की जरूरत थी।

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    English summary
    Bombay High court grants man divorce after wife assaults him, slaps his mother

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