कोरोना मरीजों में 'रक्त का थक्का जमना' बन रहा मुसीबत, बढ़ रहे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामले

बीते 1 साल में देश के हर कोने से कोरोना वायरस के मामले सामने आए हैं। कोरोना से संक्रमित लोगों ने इसकी वजह से शरीर में कई अन्य परेशानियों की भी बात कही है।

नई दिल्ली, 8 मई। बीते 1 साल में देश के हर कोने से कोरोना वायरस के मामले सामने आए हैं। कोरोना से संक्रमित लोगों ने इसकी वजह से शरीर में कई अन्य परेशानियों की भी बात कही है। इनमें से एक परेशानी जो बीते कुछ महीनों में सामने आई है वह है कोरोना के मरीजों में खून का थक्का जमना जिसे थ्रोम्बोसिस भी कहा जाता है।

Blood clotting

विशेषज्ञों ने कहा है कि जिन लोगों में कोरोना के मध्यम और गंभीर लक्षण थे उनमें से कुछ मरीजों की रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का जमने के मामले सामने आए हैं। अगर ऐसे मरीजों का समय रहते इलाज न किया जाए तो उन्हें हार्ट अटैक, कई अंगों को नुकसान जैसी घातक परेशानी हो सकती है।

5 मई को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के एंजियोग्राफी सर्जन डॉ. अंबरीश सात्विक ने ट्विटर पर एक तस्वीर पोस्ट की थी जो वायरल हो गई। यह तस्वीर कोरोना से पीड़ित एक रोगी के अंग की धमनी में बने खून के थक्के की थी।


डॉ. अंबरीश सात्विक ने कहा कि, 'हम औसतन हर हफ्ते इस तरह के 5-6 मामले देख रहे हैं। इस हफ्ते प्रतिदिन इस तरह का एक मामला सामने आ रहा है।' उन्होंने आगे कहा कि कोरोना के कारण धमनी का थक्का जमने से दिल का दौरा, स्ट्रोक और अंग खराब होने का खतरा 2 से 5 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

शेयर की गई तस्वीर के बारे में डॉ. सात्विक ने बताया यक तस्वीर एक कोरोना पीड़ित के अंग की धमनी में बने खून के थक्के की है, जिसके कारण उसके शरीर में खून का परिसंचरण कम हो रहा था, लेकिन समय पर इलाज कर उसे बचा लिया गया।

उन्होंने आगे कहा कि शुरुआती दौर में कोरोना और रक्त का थक्का जमने के मामले में कोई खास संबंध नहीं देखा गया था लेकिन जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर इसको लेकर रीसर्च हुई तो सामने आया कि कोविड न केवल फेंफड़ों को हानी पहुंचा रहा है बल्कि यह मरीजों में रक्ता के थक्के भी बना रहा है और 30 से 40 साल के मरीजों में इसकी वजह से दिल का दौरा पड़ने और स्ट्रोक की परेशानी हो रही है।

डॉ. सात्विक ने कहा कि गंभीर कोरोना के मामलों में रक्त का थक्का जमने की परेशानी ज्यादा हो रही है। उन्होंने कहा कि चूंकि वायरस सबसे पहले फेंफड़ों को प्रभावित करता और और फेंफड़ों से ही रक्त वाहिकाएं जुड़ी होती हैं, जिसकी वजह से वह भी प्रभावित हो रही हैं।

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उन्होंने कहा कि कोरोना से संक्रमित मरीज में एक से दो हफ्ते के अंदर रक्त का थक्का जम सकता है। वहीं, गंभीर मामलों में यह 2 से 3 हफ्तों के बाद भी हो सकता है। डॉ. सात्विक ने कहा कि रक्त का थक्का जमने से धमनियां और नसें दोनों प्रभावित होती हैं, जो रोगी पहले से किसी बीमारी से ग्रसित हैं उन्हें रक्त का थक्का जमने से ज्यादा परेशानी हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि रक्त का थक्का किसी भी उम्र के लोगों में जम सकता है और पहले से इसपर काबू करने का कोई तरीका नहीं है।

हमने 30 से 92 साल के लोगों में इस परेशानी को देखा है। उन्होंने कहा कि इस हफ्ते हमने 4 ऐसे मामले देखे। उन्होंने आगे कहा कि मेरे कई सहयोगियों को भी दिल का दौरा पड़ने के मामले मिल रहे हैं, इसके साथ-साथ थक्का जमने से स्ट्रोक के भी मामले सामने आए हैं।

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