'हारे हुए दुखियारे की तरह ना करें व्यवहार', स्पीकर ओम बिरला के निर्णय पर विपक्ष ने उठाए सवाल BJP ने कसा तंज
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में पूर्व की इंदिरा सरकार के कार्यकाल के दौरान लगाई गई इमर्जेंसी की निंदा की। सदन में उनकी पहली ही स्पीच सुनकर विपक्ष हक्का बक्का रह गया। दरअसल, स्पीकर ने ना सिर्फ वर्ष 1975 के दौरान तत्कालीन केंद्र की इंदिरा सरकार के इमर्जेंसी के फैसले को गलत ठहराया बल्कि उन्होंने इस पर दो मिनट का मौन भी रखवा दिया। जिस पर खड़े हो रहे सवालों को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस को निशाने पर लिया है।
लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने के बाद, ओम बिड़ला ने 1975 में तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल की जमकर निंदा की। वहीं आपातकाल पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निर्णय पर टिप्पणी की। कांग्रेस और आईएनडीआईए को निशाने पर लेते हुए कहा कि विपक्ष को एक हारे हुए व्यक्ति जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।

एक्स पर एक पोस्ट में बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा, " आईएनडीआईए गठबंधन और इसके नेता को अब भाषण देना बंद कर देना चाहिए। इस पद को सदन की कार्यवाही पर सर्वोच्च शक्ति प्राप्त है। आपने अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और हार गए। हारे हुए दुखियारे की तरह व्यवहार न करें...अगर शेर से लड़ना चाहते हो, तो थोड़ा साहस भी रखना होगा।"
वहीं कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने राहुल गांधी की की ओर नेता प्रतिपक्ष की ओर स्पीकर के भाषण पर आपत्ति को लेकर एक बायन दिया। जिसमें उन्होंने कहा, "हमने संसद के बारे में कई मुद्दों पर चर्चा की। एलओपी राहुल जी ने उन्हें ( स्पीकर ओम बिरला) बताया कि उन्होंने अपने भाषण ऐसे शब्दों को इस्तेमाल किया जो एक राजनीतिक संदर्भ थे, इससे बचा जा सकता था।"












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